प्रेग्नेंसी महिलाओं के जीवन का सबसे अहम हिस्सा मानी जाती है। इस दौरान महिलाओं में हार्मोनल उतार-चढ़ाव के चलते शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलते हैं। प्रेग्नेंसी में महिलाओं के खान-पान पर भी खास ध्यान दिया जाता है। भारतीय घरों में अक्सर प्रेग्नेंट महिलाओं को ज्यादा खाने की हिदायतें दी जाती हैं, ताकि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी पूरा पोषण मिल पाए। कई बार यह देखा गया है कि महिलाएं ज्यादा भोजन करने लगती है और इससे उन्हें कई तरह की समस्याएं होने लगती है। ऐसे में सवाल यह आता है कि महिलाओं को भोजन लेते समय कितनी कैलोरी लेनी चाहिए और कैलोरी लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए इस आर्टिकल के जरिए इन सभी बातों के जवाब जानते हैं।
प्री-प्रेग्नेंसी वजन और बॉडी मास इंडेक्स (BMI)
एक्सपर्ट्स के अनुसार महिलाओं का प्रेग्नेंसी से पहले का वजन बहुत जरुरी होता है, क्योंकि उसी के अनुसार गर्भवती महिलाओं को कैलोरी लेने के सलाह दी जाती है। अगर वजन ज्यादा बढ़ जाए तो गर्भवती महिलाओं को गंभीर जटिलताएं हो सकती है इसलिए अलग-अलग बीएमआई की महिलाओं के लिए कैलोरी की मात्रा भी अलग होती है।

कम वजन होना (BMI 18.5 से कम होना)
जिन महिलाओं का वजन कम होता है, उन्हें कैलोरी की ज्यादा जरूरत होती है, ताकि भ्रूण का वजन और विकास बेहतर तरीके से हो पाए। ऐसी महिलाओं को दूसरी तिमाही से रोजाना 500-600 कैलोरी ज्यादा लेने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर कम वजन की महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान 12-18 किलो वजन बढ़ाने के लिए कहा जाता है।
मोटापा (BMI 30 या उससे ज्यादा)
ऐसी महिलाएं प्रेग्नेंसी से पहले जितनी कैलोरी लेती थी, उन्हें उतनी ही कैलोरी लेने की सलाह दी जाती है, ताकि उनका वजन धीरे-धीरे बढ़ पाए, जो बच्चे की सेहत को स्पोर्ट करे। ज्यादा वजन होने के कारण प्रेग्नेंट महिलाओं को 5-9 किलो बढ़ाने की सलाह दी जाती है।
सामान्य से ज्यादा वजन (BMI 25-29.9)
अक्सर ऐसी महिलाओं का प्रेग्नेंसी में ज्यादा वजन न बढ़े, इसके लिए ये ध्यान रखा जाता है कि वह रोजाना 200-300 अतिरिक्त कैलोरी ही लें। उनके खाने में पोषण से युक्त भोजन पर ज्यादा फोकस किया जाता है। उन्हें पूरी प्रेग्नेंसी में करीब 6-11 किलो वजन बढ़ाने के लिए कहा जाता है।
हाइट और शरीर की संरचना
जो महिलाएं लंबी होती हैं, उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा कैलोरी लेनी चाहिए, क्योंकि उनका बेसल मेटाबॉल्कि रेट (BMR) कम हाइट की महिलाओं के मुकाबले ज्यादा होता है। वैसे भी लंबे कद की महिलाओं को काम करने के लिए ज्यादा एनर्जी की जरुरत होती है और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा कैलोरी की जरुरत पड़ती है। वहीं छोटी हाइट की महिलाओं को एनर्जी कम लगती है, इसलिए उन्हें 2200 -2500 कैलोरी लेने की सलाह दी जाती है।

उम्र
युवा प्रेग्नेंट महिलाओं को अधिक कैलोरी की जरूरत होती हैं, क्योंकि उनका शरीर भी विकसित हो रहा होता हैं और साथ ही उनके भ्रूण के विकास के लिए भी कैलोरी जरूरी है। इसके विपरीत जो महिलाएं 35 या उससे अधिक उम्र की होती हैं, उन्हें कम कैलोरी की जरूरत होती है। अगर महिला का मेटाबॉल्जिम धीमा होता है, तो उसके मामले में खास ध्यान रखा जाता है। बढ़ती उम्र की गर्भवती महिलाओं के कैल्शियम और फॉलिक एसिड पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, ताकि बच्चे की हेल्थ सही रहे।
एक्टिविटी लेवल
प्रेग्नेंसी में महिलाएं कितना शारीरिक काम करती हैं, इस बात पर भी कैलोरी निर्भर करती है। आमतौर पर प्रेग्नेंसी में महिलाओं को कम स्तर की कसरत जैसे कि वॉक, तैराकी और प्रीनेटल योग करने की सलाह दी जाती है, जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में ज्यादा एक्टिव होती हैं, उन्हें रोजाना 350-450 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत पड़ती है लेकिन ये उनकी एक्टिवटीज पर भी निर्भर करता है जो महिलाएं प्रेग्रेंसी में काम नहीं करती, उन्हें दिन में 200-300 अतिरिक्त कैलोरी लेने को कहा जाता है।

बीमारी होने पर
यदि किसी गर्भवती महिला को जेस्टेशनल डायबिटीज है, उन्हें कार्बोहाइड्रेट्स पर खास ध्यान देना चाहिए, ताकि उनके ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहे। इसी तरह से थायराइड में भी अलग-अलग कैलोरी की जरूरत पड़ती है। हाइपरथायराइड में ज्यादा कैलोरी चाहिए तो हाइपोथायराइड में मेटाबॉल्जिम धीमा होने के कारण कम कैलोरी लेने के लिए कहा जाता है।
पोषण पर दें ध्यान
हालांकि गर्भवती महिलाओं को कैलोरी पर चेक रखना चाहिए लेकिन इसके साथ ही क्वालिटी पर ध्यान देना भी जरूरी है। ऐसे में डाइट लेते समय इन बातों का खास ध्यान रखें, जैसे कि लीन प्रोटीन – चिकन, मछली और बीन्स। साबुत अनाज ब्राउन राइस, क्विनोआ, साबुत अनाज की ब्रेड, हेल्दी फैट्स एवाकाडो, मेवे, ऑलिव तेल, फल और सब्जियां विटामिन और मिनरल के लिए मौसमी फल सब्जियां जरूर लें। पोषण से युक्त डाइट लेने से महिलाओं की प्रेग्नेंसी सेहतमंद रहेगी और बच्चे का विकास भी अच्छी तरह से होता है। इसलिए महिलाओं को कैलोरी और पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए।

