जालंधर: एक मामूली सी दिखने वाली सूजन कब जानलेवा बन सकती है, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होता। जालंधर की 65 वर्षीय महिला के साथ भी ऐसा ही हुआ, जब दाहिने ग्रोइन में हल्की सूजन से शुरू हुई समस्या कुछ ही दिनों में गंभीर रूप ले बैठी।
मेडिकल प्रक्रिया के बाद बढ़ी दिक्कत
शुरुआत में महिला ने इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन सूजन तेजी से बढ़ने लगी और दर्द भी बढ़ गया। परिवार की चिंता तब और बढ़ गई जब यह समस्या हाल ही में करवाई गई एक मेडिकल प्रक्रिया के बाद सामने आई। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत एन.एच.एस अस्पताल ले जाया गया।
जांच में सामने आई खतरनाक स्थिति
अस्पताल में विशेषज्ञों ने जांच के बाद मरीज को इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग भेजा। अल्ट्रासाउंड में खुलासा हुआ कि कॉमन फेमोरल आर्टरी में बड़ा प्सूडोएन्यूरिज़्म बन गया है और आर्टरी व वेन के बीच फिस्टुला भी मौजूद है। यह एक गंभीर वैस्कुलर जटिलता थी, जिसका तुरंत इलाज जरूरी था।
बिना सर्जरी अपनाई गई आधुनिक तकनीक
डॉक्टरों ने ओपन सर्जरी के बजाय मिनिमली इनवेसिव तकनीक का सहारा लिया। 3D फ्लैट पैनल कैथ लैब में डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी के जरिए सटीक स्थिति का पता लगाया गया। लोकल एनेस्थीसिया में छोटे से छेद के माध्यम से स्टेंट डालकर असामान्य रक्त प्रवाह को रोका गया।
तेजी से रिकवरी, अगले दिन छुट्टी
पूरी प्रक्रिया बिना किसी बड़े चीरे या टांकों के सफलतापूर्वक पूरी हुई। इलाज के तुरंत बाद सूजन कम होने लगी और मरीज को राहत मिली। सबसे खास बात यह रही कि महिला को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह सामान्य रूप से चलने लगी।
समय पर इलाज बना जीवनरक्षक
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जटिल बीमारियों का इलाज अब सुरक्षित और आसान हो गया है। यह मामला एक बड़ा संदेश देता है कि किसी भी असामान्य सूजन या दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि सही समय पर इलाज जीवन बचा सकता है।
