शादी के बाद हर महिला का सपना होता है कि उसके घर में नन्हा बच्चा आए। लेकिन कुछ स्वास्थ्य स्थितियां ऐसी होती हैं, जिनके कारण प्रेगनेंसी प्लान करना न केवल मां की सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है, बल्कि बच्चे के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी महिला को निम्नलिखित चार बीमारियां हैं, तो उन्हें बेबी प्लान करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। आइए इन बीमारियों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
हार्ट डिजीज

अगर किसी महिला को हार्ट डिजीज है, जैसे कि कमजोर दिल, कार्डियक अरेस्ट का इतिहास, या कार्डियोवैस्कुलर डिजीज की अंतिम स्टेज में हैं, तो उन्हें बच्चे का प्लान नहीं करना चाहिए। इस अवस्था में हार्ट काफी कमजोर होता है, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में अगर महिला प्रेग्नेंसी की कोशिश करती है, तो यह न केवल उसकी बल्कि बच्चे की जान को भी खतरे में डाल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में महिला की सेहत में सुधार होने का इंतजार करना चाहिए, और तब ही बच्चा कंसीव करने पर विचार करना चाहिए।
टीबी (तपेदिक)

टीबी की बीमारी के चलते भी महिलाओं को प्रेग्नेंसी की योजना बनाने से बचना चाहिए। यदि किसी महिला को टीबी है, तो बच्चे में संक्रमण का खतरा हो सकता है। यह स्थिति मां और बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पहले टीबी का पूरा इलाज कराएं, और उसके बाद ही बच्चे के बारे में सोचें। टीबी के मामले में एचआईवी भी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें डॉक्टर की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है।
किडनी की गंभीर बीमारी

किडनी की गंभीर समस्याओं से जूझ रही महिलाओं, विशेषकर जो डायलिसिस पर हैं, को भी बेबी प्लान नहीं करना चाहिए। किडनी की बीमारी में संक्रमण का जोखिम अधिक होता है, जो गर्भवती महिला और बच्चे के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। डायलिसिस का इलाज खत्म होने या किडनी ट्रांसप्लांट के बाद, कम से कम तीन साल का गैप लेना चाहिए। इस दौरान महिला को अपनी सेहत पर ध्यान देने और डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता होती है।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं जैसे कि डिप्रेशन, एंजायटी या अन्य मानसिक रोगों का भी प्रेग्नेंसी पर गंभीर असर हो सकता है। ऐसे में महिला को गर्भधारण से पहले अपनी मानसिक सेहत पर ध्यान देना आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होने पर ही प्रेग्नेंसी की योजना बनानी चाहिए।
