कहते हैं अच्छे जीवन के लिए निरोगी काया और अच्छी नींद होना बेहद ही खास है। लेकिन आज के लाइफस्टाइल को देखते हुए अच्छी नींद न आना ही एक सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। दरअसल खराब लाइफस्टाइल, फोन की लत और नशे की आदत ने सोने और जागने के क्रम को खराब कर दिया है। वहीँ नींद की कमी कई बीमारियों को जन्म देता है। जिसमे मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और खराब मेंटल हेल्थ शामिल है। सोशल मीडिया के दौर में तो नींद कम आना एक बीमारी बनता जा रहा है। इसके लिए लोग दवाएं खाते हैं और यहां तक की सालों तक इलाज भी चलने के बावजूद उन्हें आराम नहीं मिलता है। ऐसे में आपको ये जानना बेहद जरुरी है कि अच्छी नींद क्या है, ये कितने घंटे की होनी चाहिए, आपको बेहतर नींद कैसे आए।
आपको बता दें अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के मुताबिक, एक व्यक्ति को दिन में कम से कम 8 घंटे की नींद जरुर पूरी करनी चाहिए। वहीँ बहुत से लोग 8 घंटे की नींद लेने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन उन्हें इतनी नींद आती ही नहीं है। कई लोग तो सिर्फ 4 घंटे की नींद ही लेते हैं और इतने कम समय में उनकी नींद पूरी भी हो जाती है। आपको बता दें 7 से 8 घंटे सोने वाले लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं होता है कि 4 घंटे में भी नींद पूरी हो सकती है। लेकिन क्या ऐसा सही में है? आखिर नींद के घंटे कितने होने चाहिए? जिससे शरीर फिट रहे।
नींद की क्वालिटी
आपको बता दें एक्सपर्ट्स कहते हैं कि नींद के घंटे नहीं, बल्कि नींद की क्वालिटी मायने रखती है। कई रिसर्च कहती हैं कि सात से 8 घंटे की नींद का समय सबसे अच्छा है। लेकिन यह वास्तव में व्यक्ति पर ही निर्भर करता है। कुछ लोग रात में 8 या उससे कम घंटे सोते हैं, लेकिन फिर भी वे फ्रेश महसूस करते हैं। जबकि अन्य कुछ को आराम महसूस करने के लिए 8 घंटे से ज्यादा की नींद चाहिए होती है।
गहरी नींद आना
आपको इस बात को समझने की भी जरूरत है की आप कितनी गहरी नींद में सोये। वहीँ जिनका गहरी नींद का समय ज्यादा होता है उनके लिए 4 घंटे सोना काफी है। इनको डीप स्लीपर कहते हैं। ऐसे लोग कम नींद लेकर भी किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या का का शिकार नहीं होते हैं। जबकि जो लोग हल्की नींद में सोते हैं वह 7 से 8 घंटे सोकर भी नींद पूरी न होने के कारण कई तरह की हेल्थ issue को झेलते हैं। इनको लाइट स्लीपर कहा जाता है।
आखिर क्या होती है स्लीप साइकिल
स्लीप साइकिल का मतलब, नींद का पूरा चक्र। इसमें सोने से लेकर जागने तक के कई चरण होते हैं। इसकी शुरुआत लाइट स्लीप से होती है। वहीँ बिस्तर पर सोने के बाद जब आपको नींद आनी शुरू होती है तब वो पहली स्टेज होती है। इसमें नींद कच्ची रहती है और आंखों की पुतलियां चलती रहती हैं। इस स्टेज में ब्रेन में कई एक्टिविटी रहती है। हर व्यक्ति में इस स्टेज के घंटों का समय अलग अलग होता है। आमतौर पर 2 घंटे के बाद इस स्टेज से शरीर दूसरी स्टेज में जाता है। इस दौरान आंखों की गति धीमी हो जाती है। हार्ट रेट भी पहले से सामान्य हो जाता है। यहां से दूसरी स्टेज की शुरुआत होती है।
दूसरी स्टेज
दूसरी स्टेज डीप स्लीप यानी गहरी नींद में होना होता है। इसमें ब्रेन शांत और नींद गहरी होती रहती है। डीप स्लीप में जो इंसान ज्यादा समय रहता है उसको कम घंटे सोने के बावजूद भी नींद पूरी हो जाती है। इस स्टेज में नींद में किसी प्रकार का कोई दखल नहीं रहती है। इस दौरान किसी तरह के सपने भी नहीं आते हैं।
आखिरी स्टेज
आखिरी स्टेज को REM SLEEP बोला जाता है। इस स्टेज में नींद का चरण पूरा हो रहा होता है। इसमें व्यक्ति सपने देखता है। सपनों की वजह से आंखों की पुतलियां इधर – उधर घूमती रहती हैं। ये समय दो घंटे तक का हो सकता है।
हर स्टेज का समय अलग- अलग होता है
एक्सपर्ट्स के मुताबिक गहरी नींद, हल्दी नींद और आरईएम इन तीनों स्टेज का समय हर व्यक्ति में अलग- अलग हो सकता है। जो लोग लाइट स्लीप में ज्यादा समय तक रहते हैं उनको 7 से 8 घंटे सोने के बाद नींद पूरी होने का अहसास होता है, जबकि जो डीप स्लीप में ज्यादा रहते हैं उनकी नींद 4 घंटे सोकर ही पूरी हो सकती है। जो लोग आरईएम स्टेज यानी तीसरी स्टेज में ज्यादा समय रहते हैं उनको 8 घंटे सोकर भी कई बार नींद पूरी न होने का अहसास हो सकता है।
स्लीप साइकिल को समझें
अगर रात को 10 से 11 बजे सोने के बाद आपकी आंख 6 बजे खुल जाये तो इसका मतलब आपकी नींद पूरी हो चुकी है। ऐसे में आपको दोबारा नहीं सोना है। ये करने से शरीर फिर से दूसरी स्लीप साइकिल में जाने लगता है और इस दौरान अगर आप फिर 8 या 9 बजे के बीच उठते हैं तो नींद बाधित हो जाती है। यही कारण है कि कुछ लोग 8 से 9 घंटे सोकर भी फ्रेश महसूस नहीं कर पाते हैं।
क्यों कुछ लोग होते हैं लाइट स्लीपर
नींद कम आना या लाइट स्लीप में रहने के ये कारण हो सकते हैं
डिप्रेशन की समस्या
एंग्जाइटी
शराब ज्यादा पीना
खरार्टे ज्यादा आना
मानसिक तनाव
कोई मेंटल हेल्थ समस्या
गहरी नींद के लिए क्या करें
समय पर सोने की आदत डालें
हर दिन व्यायाम जरूर करें
आरामदायक गद्दे और तकिए का इस्तेमाल करें
रात को शराब, चाय या कॉफी न पिएं
सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद कर दें
