स्ट्रोक एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण आपके दिमाग की नसों में खून जाना बंद हो जाता है। इसके कारण हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है। स्ट्रोक कई तरह का होता है जिसमें से एक को मिनी स्ट्रोक भी कहते हैं। मिनी स्ट्रोक को ट्रांसिएंट इस्कैमिक अटैक भी कहते हैं। इसमें लक्षण छोटे स्ट्रोक ये अटैक छोटे स्ट्रोक की तरह होते हैं जो कुछ मिनटों या फिर घंटों में खुद ही ठीक हो जाते हैं लेकिन ऐसा होने पर आप डॉक्टर को जरुर दिखाएं ताकि पता चल पाए कि कहीं यह गंभीर स्ट्रोक तो नहीं है। आइए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए मिनी स्ट्रोक के लक्षण, कारण और बचाव बताते हैं।

लक्षण

मिनी स्ट्रोक के लक्षणों की बात करें तो इसमें शरीर को एक तरफ से कमजोरी ,देखने में दिक्कत, शरीर में असंतुलन होना, चक्कर आना, बोलने में दिक्कत जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यह लक्षण लंबे समय तक नहीं रहते हालांकि एक या दो घंटे तक ही रहते हैं। ऐसे लक्षण 24 घंटों में ठीक हो जाते हैं लेकिन इनको नजरअंदाज न करें।

बोलने में कठिनाई होना

यदि आपको अचानक से बोलने में दिक्कत हो रही है। इसके अलावा दूसरों को समझने में आपको कठिनाई हो सकती है। भले ही आपको पता हो कि क्या हो रहा है। यह मस्तिष्क के उन क्षेत्रों में होता है जो भाषा के कारण होते हैं।

बहुत ज्यादा सिर में दर्द

इसके कारण सिरदर्द में कम आम है लेकिन कुछ लोगों को बिना किसी कारण बहुत ज्यादा सिरदर्द हो सकता है। मस्तिष्क में ब्लड फ्लो में अचानक कमी का संकेत भी हो सकता है।

अचानक से शरीर में सुन्नपन होना

शरीर के एक तरफ यदि सुन्नपन या फिर कमजोरी होना भी इसका लक्षण है। उदाहरण के तौर पर यदि आपका चेहरा का एक हिस्सा लटक रहा है या फिर हाथ कमजोर और सुन्न हो रहा है तो यह भी मस्तिष्क के कुछ ब्लड फ्लो में अस्थायी कम के कारण हो सकती है। इसके कारण मांसेपेशियों की गति को कंट्रोल करने वाली नसों भी प्रभावित होती है।

ऐसे करें बचाव

मिनी स्ट्रोक का बचाव उसके लक्षणों की जांच करने और मरीज के पूरी तरह स्कैन करने के बाद दिख किया जाता है। इसकी पहचान करने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन और इकोकार्डियोग्राफी की जाती है।

सीटी स्कैन

मिनी स्ट्रोक का शारीरिक टेस्ट होने के लिए जरुरी टेस्ट हो जाने के बाद, दिमाग में खून के थक्कों की जांच करने के लिए सीटी स्कैन भी जरुर करवाएं।

एमआरआई स्कैन

यदि सिटी स्कैन से यह साफ पता न चले कि मिनी स्ट्रोक है तो रक्त के थक्कों की जांच के लिए दिमाग के एमआरआई स्कैन करवाया जाता है। टेस्ट के बाद ही आगे का इलाज होता है।

शरीर का टेस्ट करवाएं

इसमें मरीजों की शारीरिक एक्टिविटी और लाइफस्टाइल का भी टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा ब्लड शुगर, एमिनो एसिड होमोसिस्टीन, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रशर जैसा चेकअप भी होते हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

 

By tnm

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