कैंसर का नाम सुनते ही दिल डर जाता है। इस शब्द से कई लोग डरते हैं लेकिन आज के समय में कई लोग इससे जूझ रहे हैं। ब्रेस्ट, मुंह और पेट के कैंसर के बारे में आपने कई बार सुना होगा लेकिन क्या आपने थायरॉयड कैंसर के बारे में सुना है। यह कैंसर भले ही आम न हो लेकिन इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है जबकि फेफड़े, ब्रेस्ट ओवेरियन के कैंसर ज्यादा आम है। थायरायड कैंसर का स्वास्थ्य पर गंभीर तौर पर असर पड़ता है। गर्दन के निचले हिस्से में थॉयराइड ग्रंथि ही वो जगह है जहां पर कैंसर विकसित होता है। यह शरीर की चयापचय, हृदय गति और अन्य जरुरी कार्यों को प्रभावित करता है ।
थॉयरायड कैंसर के प्रकार
यह कैंसर कई रूपों में प्रकट हो सकता है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशेषताएं है और इसका शरीर पर प्रभाव भी होता है।
फॉलिक्युलर थायरॉयड कैंसर
कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक शोध के अनुसार, इस रूप में हर्थल सेल कैंसर शामिल है और इसके फेफड़ों और हड्डियों जैसे अंगों तक फैलने की ज्यादा संभावना है। यह कम आम है लेकिन इसकी आक्रामक प्रकृति के कारण सावधानीपूर्वक ध्यान देने की आपको जरुरत है।

एनाप्लास्टिक थायरॉयड कैंसर
यह थायरॉयड कैंसर का एक बहुत ही दुर्लभ और आक्रामक रूप है यह तेजी से फैलता है, जिसके लिए तुरंत उपचार की जरुरत होती है।
पैपिलरी थायरॉयड कैंसर
यह कैंसर सबसे आम प्रकार है, जो 50% से अधिक मामलों में होता है। यह अपनी धीमी वृद्धि और गर्दन में लिम्फ नोड्स तक फैलने की क्षमता के लिए जाना जाता है हालांकि, फैलने की अपनी प्रवृत्ति के बावजूद इसका अक्सर समय पर इलाज होने पर अच्छा निदान होता है।
मेडुलरी थायरॉयड कैंसर
यह कैंसर काफी दुर्लभ है, लेकिन यह आनुवंशिक स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। इसके आक्रामक स्वभाव के कारण अक्सर इसमें तुरंत हस्तक्षेप की जरुरत होती है।
कारण और जोखिम कारक
यह कैंसर कई कारणों से विकसित हो सकता है, और जोखिम कारकों को समझना शुरुआती पहचान के लिए जरूरी है। थायरॉयड कैंसर 40 से ज्यादा उम्र के लोगों में आम है। थायरॉयड कैंसर या स्तन या वृषण कैंसर जैसे अन्य कैंसर का पारिवारिक इतिहास भी जोखिम को बढ़ाता है। बढ़े हुए गोइटर, आयोडीन की कमी या थायरॉयडिटिस जैसी स्थितियां कैंसर के विकास में योगदान कर सकती हैं।

