आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में लोगों को डर रहता है कि कहीं वे इस रेस में किसी से पीछे न रह जाए। यही चीजें युवाओं के जीवन में मानसिक तनाव को तेजी से बढ़ा रही हैं। किशोर और युवा वर्ग, स्कूल और कॉलेज के दबाव, सोशल मीडिया की बढ़ती मांग और समाज में खुद की पहचान बनाने के चक्कर में मानसिक संघर्ष से जूझ रहे हैं। इसलिए माता-पिता के लिए ये बेहद जरूरी हो गया है कि वे इन चुनौतियों को समझें और अपने बच्चों को इस तनाव से बाहर निकालने में मदद करें।
Judgement-Free Zone
कोशिश करें कि अपने बच्चों के साथ खुलकर और ईमानदारी से बात करें। उन्हें महसूस कराएं कि आप उनके साथ हैं और वे आपसे कुछ भी शेयर कर सकते हैं। जब उनकी बात सुनें तो धैर्य रखें और तुरंत सलाह या फैसले न सुनाएं और ओवररिएक्ट बिल्कुल न करें, ऐसे में आपका बच्चा घबरा जाएगा और हो सकता है कि आगे से आपके साथ कुछ भी शेयर न करे। जजमेंट-फ्री जोन बनाएं जहां वे अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकें।
Supportive Environment
घर में ऐसा माहौल बनाएं कि बच्चे को सपोर्टिव महसूस हो। जहां आपका बच्चा इमोशन रूप से सुरक्षित फील करे। क्रिटिकल कमेंट्स करने से बचें और उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर उन्हें प्रोत्साहित करें ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े।
Help in reducing Stress
आजकल के जमाने के हिसाब से बच्चे पढ़ाई और एक्स्ट्रा-कैरिकुलर एक्टिविटीज में ही उलझे रहते हैं तो इसलिए माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि वे इस दबाव को कम करने में उनकी मदद करें। उन्हें एक स्वस्थ संतुलन बनाने के लिए प्रेरित करें ताकि वे पढ़ाई के साथ-साथ अपने दोस्तों और मनोरंजन के लिए भी समय निकाल सकें।
Limited Screen Timing
सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी का ज्यादा उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ देता है। बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें और उन्हें फेस-टू-फेस इंटरैक्शन के लिए ज्यादा प्रेरित करें। उन्हें असल दुनिया में लोगों से मिलने-जुलने और समय बिताने के लिए प्रेरित करें, ताकि वे दुनिया और लोगों को समझ सके।
Don’t feel Shy in seeking Professional help
जब आपको लगे कि आपके बच्चे में किसी मानसिक समस्या के लक्षण दिख रहे हैं, तो बिना देरी किए प्रोफेशनल काउंसलर या साइकॉलजिस्ट से मदद लें। अगर आप ये सोचते रहेंगे कि लोग क्या सोचेंगे तो आपके बच्चे की मानसिक सेहत ज्यादा खराब हो सकती है। सही समय पर बच्चे की मदद की गई तो वे बेहतर हो सकता है।
