गर्भावस्था में बड़ी से लेकर छोटी सी बातों पर ध्यान रखना जरूरी है। शुरूआत से ही सतर्क रहना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था एक कोमल स्टेज है। इसमें महिलाओं को बहुत सी सम्सयाओं का सामने करना पड़ता है। महिला का शरीर भी बहुत कमजोर हो जाता है। शुरूआत से लेकर डिलीवरी तक ध्यान रखने की जरूरत होती है।

शरीर में बदलाव गर्भ के ठहरने के कुछ ही दिनों बाद शुरू हो जाते हैं। इसमें आपको बताया जाएगा कि गर्भ ठहरने के कितने दिनों बाद प्रेगनेंसी का पता चलता है और प्रेगनेंसी के शुरूआती संकेत कौन से हैं।

एक्सपर्ट के अनुसार गर्भ धारण करने के 6 से 12 दिन बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट से गर्भधारण का पता लग सकता है। यह टेस्ट यूरिन या ब्लड ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन हार्मोन की उपस्थिति का पता लगाने में मदद करता है।जब फर्टिलाइज्ड एग यूट्रिन लाइनिंग से जुड़ जाता है तो यह हार्मोन प्रड्यूस होना शुरू होता है, लेकिन प्रेग्नेंसी टेस्ट का रिजल्ट इसके अलावा कई दूसरी चीजों पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए टेस्ट किस तरह लिया गया, सही समय पर किया गया है कि नहीं या मेंस्ट्रुअल साइकिल किस तरह काम कर रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि प्रेग्नेंसी का पता करने के लिए पीरियड्स मिस होने के बाद ही टेस्ट करना चाहिए।

Symptoms of Initial Stage of Pregnancy

यह तो सभी को पता ही है कि प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिन किसी भी महिला के लिए बहुत सेंसिटिव होते हैं। इस कारण महिला को थकावट ज्यादा रहने लगती है। उल्टी और मतली होने जैसा महसूस होता है, मॉर्निंग सिकनेस, ब्रेस्ट में हल्कापन, बार-बार यूरिनेट के लिए जाना और गंध आने जैसी समस्याएं होती हैं। ये सभी चीजें तभी होती है क्योंकि हार्मोन्स में बदलाव होता है। इस स्थिती में हमारा शरीर एम्ब्रियो के लिए खुद को तैयार कर रहा होता है। इस दौरान जब कुछ महिलाओं को हल्की ब्लड स्पॉटिंग या क्रैम्प्स हों तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते हैं।

शुरुआत में रखें इन चीजों का ध्यान

Follow करें Healthy Lifestyle

हेल्दी आदतों को अपनाना बहुत जरूरी है ताकि प्रेग्नेंसी में कोई दिक्कत न हो। इससे पर्याप्त मात्रा में आराम मिलेगा। बैलेंस डाइट लेना, समय पर सोना, फिजिकली एक्टिव रहना और खुद को खुश रखना बहुत जरूरी है।

Main Focus on Diet

डाइट में फोलिक एसिड युक्त चीजें शामिल करना न भूलें। इसके अलावा हाइड्रेटेड रहना बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में फल, जूस, हरी सब्जियां और हेल्दी फैट्स जरूर एड करें।

Exercise on Daily basis

गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह पर कोई न कोई एक्सरसाइज की आदत जरूर डालें। इससे बॉडी को एक्टिव रहने में मदद मिलती है। इसके लिए थोड़ी-बहुत वॉक भी कर सकते हैं। साथ ही डॉक्टर के टच में रहना बहुत जरूरी है। इस समय में किसी भी बदलाव को नजरअंजाद न करें।

By tnm

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