जिसे देखो भागदौड़ में लगा हुआ है। ऐसे में उसकी मेंटल हेल्थ पर काफी असर भी पड़ रहा है। बहुत से लोग खुद को तनाव से दूर रखने के लिए मैडिटेशन या योग का सहारा लेते हैं। वहीँ बहुत से लोग गाने सुन कर अपनी मानसिक सेहत को दुरुस्त रखते हैं। लेकिन बता दें आज कल बहुत से लोग मेंटल हेल्थ को बूस्ट करने के लिए अरोमाथेरेपी का सहारा ले रहे हैं। तो आज जानते हैं कि किस तरह से अरोमा थेरेपी काम करती है और मेंटल हेल्थ पर कैसा इफ़ेक्ट होता है।
आखिर क्या होती है अरोमाथेरेपी
बता दें अरोमाथेरेपी में कुछ आयल और खुशबूदार चीजों का यूज़ किया जाता है। अरोमा का मतलब खुशबू और थेरेपी मतलब इलाज, यानिकी खुशबू की मदद से इलाज करने को ही अरोमाथेरेपी कहा जाता है। यह मानसिक तनाव को दूर करने का सबसे बेस्ट आप्शन माना जाता है। दरअसल एसेंशियल ऑयल्स इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, यह तेल पौधों, जड़ी बूटियों, फूलों, पंखुड़ियों जैसी चीजों से निकाले जाते हैं।
मेंटल हेल्थ को बूस्ट करता है अरोमाथेरेपी
एक्सपर्ट के मुताबिक अरोमा थेरेपी में लैवेंडर कैमोमाइल जैसे एसेंशियल ऑयल्स का यूज़ किया जाता है। इस आयल में शांत करने वाले गुण होते हैं जो तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं। इससे बेहतर नींद को बढ़ावा मिलता है और जब आप सुकून भरी नींद सोते हैं तो इससे मस्तिष्क के सेल्स रिपेयर होने लगते हैं।
वहीँ एसेंशियल ऑयल्स की खुशबू लेने से कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल कम होने लगता है जो तनाव के लिए जिम्मेदार हार्मोन माना जाता है। जब आपका कोर्टिसोल हार्मोन कम होने लगता है तो आप फील गुड महसूस करते हैं।
इतना ही नहीं इससे सुकून भरी नींद आनी भी शुरू हो जाती है। इससे मेंटल हेल्थ बूस्ट होने के साथ साथ मूड पर एक पॉजिटिव इफ़ेक्ट डालता है। इसी के साथ अवसाद की भावनाओं को कम करने का भी ये कम करता है। इससे खुशी का एहसास होता है।
वहीँ देवदार की लकड़ी और चंदन जैसी सुगंध गहरी, अधिक आरामदायक नींद चक्र को बढ़ाता है और अच्छी नींद की गुणवत्ता को बढ़ाता है।
इसके अलावा क्लैरी सेज जैसे एसेंशियल ऑयल नींद को कण्ट्रोल करने वाले हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं जिससे नींद का पैटर्न सही होने लगता है।
अच्छी खुशबू वाला कमरा एक शांत और आरामदायक वातावरण बनाने का काम करता है। जिससे आराम करना और नींद आना आसान हो जाता है।
