हल्दी हमारे किचन के मुख्य मसालों में एक मानी जाती है। इसका इस्तेमाल खाना पकाने में किया जाता है। वहीं अपने औषधीय गुणों कारण यह कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देती है। कई लोग सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों को दूर करने के लिए हल्दी वाला दूध पीते हैं लेकिन जब वही हल्दी आपके लिए जहर बन जाए तब क्या होगा। अब हाल ही में कुछ स्टडीज से यह पता चलता है कि भारत, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों में बिकने वाली हल्दी में लेड की मात्रा काफी ज्यादा है। रिसर्च के अनुसार, ऐसी हल्दी खाने से बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा असर होगा और व्यस्कों में हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ेगा। तो चलिए आज आपको बताते हैं कि वैज्ञानिकों ने

खतरनाक स्तर में मौजूद है लेड

एक रिपोर्ट्स के अनुसार, साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट नामक जर्नल में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि भारत के पटना, पाकिस्तान के कराची और पेशावर जैसे शहरों में बिकने वाली हल्दी के सैंपल में लेड का स्तर 1,000 माइक्रोग्राम/ग्राम से भी ज्यादा था जो भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित 10 माइक्रोग्राम/ग्राम की सीमा से ज्यादा है। इसी तरह, गुवाहाटी और चेन्नई जैसे शहरों में भी हल्दी में लेड की मात्रा तय मानकों से ज्यादा पाई गई है।

लेड का स्वास्थ्य पर प्रभाव

लेड एक जहरीला तत्व है, और इसके अधिक सेवन से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग लंबे समय तक लेड वाली हल्दी का सेवन करते हैं, तो इसके कारण कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, खासकर बच्चों में। लेड का सेवन बच्चों के दिमागी विकास को प्रभावित कर सकता है और उनमें कांच (लेड पॉइज़निंग) की विषाक्तता बढ़ा सकता है। इसके अलावा, लेड का सेवन एनीमिया, उच्च रक्तचाप, किडनी की समस्या और इम्यून सिस्टम को कमजोर बना सकता है।

ऐसे बढ़ती है हल्दी में लेड की मात्रा

हल्दी में लेड की अधिकता का एक कारण मिलावट भी है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो हल्दी में मिलावट के लिए लेड-क्रोमेट का इस्तेमाल होता है जिससे हल्दी का रंग गहरा पीला हो जाता है और यह अधिक आकर्षक नजर आती है। लेड-क्रोमेट एक सस्ता मिलावट का ऑप्शन है, लेकिन इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।

क्या करें?

इस समस्या से बचने के लिए भरोसेमंद और प्रमाणित ब्रांड की हल्दी का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि मान्यता प्राप्त कंपनियां हल्दी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं। इसके अलावा हल्दी खरीदते समय उसके स्रोत और गुणवत्ता की जांच करना भी जरुरी है।

ऐसे घर पर हल्‍दी में लेड का पता लगाए

FSSAI के अनुसार, एक टेस्‍ट ट्यूब में एक ग्राम हल्‍दी लें और इसमें 2-3 म‍िली पानी म‍िलाए। गिलास पानी लें और अब उसमें 0.5 एमएल हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCL) को घोल डालें। अब मिश्रण को कुछ देर तक हिलाएं। यदि इस घोल में झाग बनने लगे तो समझ जाएं क‍ि इसमें लेड की मौजूदगी है।

ये होगी हेल्थ प्रॉब्लम्स

सीसा युक्त हल्दी का सेवन करना खासतौर पर बच्चों के लिए ज्यादा हानिकारक होगा। डॉ. महेश गुप्ता, वरिष्ठ कंसल्टेंट, चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के अनुसार, हल्दी में सीसा होने के कारण बच्चों की मानसिक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे उनका आईक्यू घट सकता है और वे सीखने में कठिनाई का सामना करेंगे। वयस्कों में, लंबे समय तक सीसा का सेवन करने से हृदय रोग, स्ट्रोक और कुछ न्यूरोलॉजिकल विकार भी हो सकते हैं। वहीं हल्दी में सीसा का सेवन करने से से पेट में दर्द, मितली, उल्टी, कब्ज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

इस बात का रखें खास ध्यान

हल्दी में लेड की बढ़ी हुई मात्रा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर सामने आई है जो खासतौर पर बच्चों और कमजोर लोगों के लिए खतरनाक होगी इसलिए, जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित ऑप्शन्स को अपनाना जरुरी है ताकि हम अपनी और अपने परिवार के सेहत का ध्यान रख पाएं।

By tnm

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