ओस्टियोसारकोमा एक तरह का हड्डी से जुड़ा कैंसर है। इसको समझने के लिए जरूरी है कि आप पहले यह जान लें कि कैंसर क्या होता है? यह एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। इसकी अलग-अलग स्टेजेस हो सकते हैं। यह बीमारी शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। यह तब शुरू होता है, जब बॉडी सेल्स नियंत्रण से बाहर होने लगती हैं। शरीर के लगभग किसी भी हिस्से की कोशिकाएं कैंसर बन सकती हैं और फिर यह शरीर के किसी भी हिस्से में फैल सकती हैं। ओस्टियोसारकोमा जिसको ओस्टोजेनिक सार्कोमा भी कहते हैं यह कैंसर का सबसे आम प्रकार है, जो हड्डियों में शुरू होता है। कैंसर सेल्स हड्डियों में नए सेल्स बनाती हैं, लेकिन ये हेल्दी सेल्स की तरह मजबूत नहीं हाती हैं। यह बीमारी ज्यादातर बच्चों, किशोरों और युवाओं में होती है। टीनेजर्स इस बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि वयस्कों को इस बीमारी का रिस्क नहीं होता है। बहरहाल, यह बात हम सभी जानते हैं कि यह एक घातक बीमारी है। कई लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या इस बीमारी से बचा जा सकता है? यानी क्या यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है? तो आइए जानते हैं इस आर्टिकल के जरिए।
ओस्टियोसारकोमा
वैसे तो अब भी विज्ञान ओस्टियोसारकोमा के मूल कारण को नहीं समझ पाए लेकिन, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओस्टियोसारकोमा का रिस्क सबसे ज्यादा किशोरावस्था में होता है। यदि किसी की फैमिली हिस्ट्री में यह बीमारी है, तो भावी पीढ़ी को इस समस्या के होने का जोखिम होता है। वहीं, यदि बोन टिश्यूज में सही तरह ब्लड सप्लाई नहीं होती है, तो इससे सेल्स डैमेज हो जाते हैं। ऐसे में ओस्टियोसारकोमा का जोखिम भी बढ़ सकता है।

लक्षण
ओस्टियोसारकोमा होने पर मरीज को कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे-
. हड्डियों में दर्द और ऐंठन महसूस होना
. स्किन के अंदर लंप या गांठ का बनना
. ट्यूमर के आसपास स्वेलिंग या रेडनसे छा जाना
. पैरों को प्रभावित करने पर चलने में दिक्कत होना

. जोड़ों में दर्द होने के कारण हिलने-डुलने में दिक्कत होना
. बिना वजह बुखार आना
. हल्की मूवमेंट करने से हड्डियों का टूटना
क्या यह पूरी तरह से ठीक हो सकता है?
यह पूरी तरह ठीक हो सकता है या नहीं, यह कहना मुश्किल है। असल में, मरीज ओस्टियोसारकोमा का किस स्टेज में है यह बात मायने रखती है। आमतौर पर ओस्टियोसारकोमा को तीन ग्रेड में बांटा जाता है। हाई ग्रेड, इंटरमीडिएट ग्रेड और लो ग्रेड। ओस्टियोसारकोमा के ग्रेड्स को देखकर डॉक्टर अंदाजा लगाते हैं कि यह कितना स्प्रेड होगा और इसको रोकने की कितनी संभावना है। Cancer.Net के अनुसार, यदि इस बीमारी का जल्दी यानी शुरुआती स्तर में पता चल जाए तो 5 साल तक जीवित रहने की 77 फीसदी संभावना होती है। वहीं, यदि देर से पता चले तो 5 साल तक जीवित रहने की संभावना महज 60 फीसदी रह जाती है।

इसके ट्रीटमेंट की बात करें, तो ओस्टियोसारकोमा होने पर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी दी जाती है। सर्जरी में प्रभावित हड्डी को आर्टिफिशियल इंप्लांट किया जाता है या शरीर के किसी और हिस्से की हड्डी का इस्तेमाल प्रभावित हिस्से की हड्डी की जगह लगाने के लिए किया जाता है।
