कई बार हम खांसी को नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन लंबे समय तक रहने वाली खांसी किसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकती है। उन्हीं में से एक है वॉकिंग निमोनिया यह फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी है जो कि माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया नाम के बैक्टीरिया की वजह से होती है हालांकि अन्य बैक्टीरिया भी इसका कारण बन सकता हैं। इस तरह के निमोनिया (नुह-मोह-न्यूह) से पीड़ित ज्यादातर बच्चे घर पर रहने पर इतने बीमार महसूस नहीं करते इसलिए इसको वॉकिंग निमोनिया कहते हैं हालांकि यहां तक कि एक बच्चा जो ठीक महूसस करे उसे कुछ दिनों तक घर पर ही रहना चाहिए जब तक कि उसका एंटीबायोटिक दवाईयों से उपचार शुरु न हो जाए और इसके लक्षण पूरी तरह से न ठीक हो जाएं।

वॉकिंग निमोनिया के लक्षण

जब भी आपको ऐसे लगे कि सर्दी 7-10 दिनों से ज्यादा तक है। खासतौर पर खांसी अगर बढ़ रही है तो यह वॉकिंग निमोनिया हो सकता है। इसके लक्षण अचानक नजर आएंगे या फिर इन्हें शुरु होने में ज्यादा समय लगेगा। इसके लक्षण हल्के ही होते हैं लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर भी हो सकते हैं।

ऐसा लगेगी सर्दी

जब ऐसा लगे कि सर्दी 7-10 दिनों से ज्यादा समय तक रहती है। खासतौर पर यदि खांसी बढ़ रही है या ठीक नहीं हो रही तो यह फिर वॉकिंग निमोनिया का लक्षण नहीं होता। इसके लक्षण अचानक दिखेंगे या फिर शुरु में ज्यादा समय दिखेंगे लेकिन कभी-कभी लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

लक्षण

. 101°F या फिर उससे कम बुखार।

. एक खांसी जो हफ्तों से लेकर महीनों तक रहे।

. बहुत थका हुआ महसूस करना।

. सिरदर्द, ठंड लगना, गले में खराश और सर्दी या फ्लू जैसे अन्य लक्षण

. तेज सांस लेना, घुरघुराहट या फिर घरघराहट की आवाज के साथ सांस लेना।

. सांस लेने में कठिनाई होना ।

. कान में दर्द

. सीने में दर्द या पेट में दर्द

. बेचैनी का एहसास

. उल्टी

. भूख न लगना या ठीक से खाना न खाना

. चकत्ते आना

. जोड़ों में दर्द

इसके लक्षण आमतौर पर इस बात पर निर्भर करेंगे कि संक्रमण कहां हो रहा है जिसके कारण बच्चे का इंफेक्शन फेफड़ों के ऊपरी या मध्य भाग में हो उसे शायद सांस लेने में कठिनाई होगी। वहीं दूसरे बच्चे का इंफेक्शन फेफड़ों के निचले भाग (पेट के पास) में है, उसे सांस लेने में कोई समस्या हो सकती है लेकिन पेट खराब, मतली या उल्टी हो सकती है।

ऐसे की जाती है वॉकिंग निमोनिया की पहचान

डॉक्टर वैसे तो एक टेस्ट के जरिए वॉकिंग निमोनिया का बचाव करते हैं। वे बच्चे की सांस की जांच करके और एक कर्कश ध्वनि को सुनते हैं जो अक्सर वॉकिंग निमोनिया का संकेत देगी। यदि जरुरी हो, तो वे निदान की पुष्टि करने के लिए छाती का एक्स-रे या बच्चे के गले या नाक से बलगम के नमूनों के टेस्ट भी करवा सकते हैं।

इलाज

इसके कारण होने वाले वॉकिंग निमोनिया के लिए एंटीबायोटिक्स एक प्रभावी उपचार रहेगा। आमतौर पर मौखिक एंटीबायोटिक दवाओं का 5- से 10-दिवसीय कोर्स भी दिया जाता है। यदि आपका डॉक्टर एंटीबायोटिक्स देगा तो इस बात का ध्यान रखें कि आपका बच्चा उन्हें ठीक होने के लिए निर्देशित समय के अनुसार ले रहा है।

एंटीबायोटिक्स लेना शुरू करने के बाद, आपके बच्चे द्वारा बीमारी को परिवार के अन्य सदस्यों में फैलाने की संभावना कम होगी लेकिन अपने घर के सभी लोगों को अपने हाथ अच्छी तरह से और धोने के लिए कहें। बच्चे को पीने के गिलास, खाने के बर्तन, तौलिये या टूथब्रश शेयर न करने दें। बच्चों को टिश्यू या कोहनी या ऊपरी बाजू (हाथों में नहीं) में खांसना या छींकना सिखाएं। किसी भी इस्तेमाल किए गए टिश्यू को छूने के बाद अपने हाथ जरुर धो लें।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *