कपड़े पहनने का स्टाइल किसी के बारे में बहुत कुछ बताता है। इससे सामने वाले की पर्सनालिटी ही नहीं बल्कि उसके नेचर एटिट्यूड का भी पता लगाया जा सकता है। कपड़े पहनने का सबका अपना स्टाइल, कलर चॉइस होता है। हर कोई अच्छे कपड़े पहनना चाहता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें कपड़े पहनने से ही डर लगता है। इस डर को ‘वेस्टिफोबिया’ (Vestiphobia) कहते हैं। इसका असर सबसे ज्यादा मेंटल हेल्थ और लाइफ पर पड़ता है। आइए जानते हैं इसके बारें में।

आखिर क्या है वेस्टिफोबिया?

कपड़े पहनने या किसी खास तरह के कपड़े को देखकर डर लगना वेस्टिफोबिया कहलाता है। ऐसे लोगों में कपड़े पहनने को लेकर हर समय घबराहट होती रहती है। इसकी कई वजहें भी हो सकती हैं जैसे- कपड़ों की बनावट, उसका टाइट या ढीला होना, उसे पहनने को लेकर किसी तरह की बुरी याद। हर किसी में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इस फोबिया से इंसान की जिंदगी भी बर्बाद हो सकती है।

लक्षण

. कुछ खास तरह के कपड़े पहनते समय बेचैनी, घबराहट या फिर पसीना आना।

. ऐसे कपड़े जिसे पहनने से अच्छा महसूस न होना उससे दूर भागना।

. कपड़े पहनते समय सिरदर्द, सांस की तकलीफ, दिल की धड़कना बढ़ना या पेट में मरोड़ उठना।

. किसी तरह के सोशल फंक्शन में जाने से बचना।

. किसी खास कपड़े, उसके रंग से नफरत या अजीब महसूस करना।

. किसी कपड़े से जुड़ी बुरी याद को सोच-सोचकर डरते रहना।

कारण

. किसी कपड़े को लेकर बुरा फील अनुभव होना जैसे उसे पहनकर कहीं गिर जाने से मजाक बनना या उसमें फंस जाना।

. कपड़ों की बनावट की चुभन से बेचैनी होना।

. किसी कपड़े को पहनने को लेकर फैमिली, फ्रेंड्स या सोसाइटी का प्रेशर।

. किसी कपड़े को पहनने से खुजली, सांस लेने में तकलीफ महसूस होने के कारण इससे बचना।

. तनाव या एंग्जाइटी या किसी तरह की मेंटल प्रॉब्लम।

ऐसे करें बचाव

. काउंसलिंग और थेरेपी की मदद से वेस्टिफोबिया से निपटा जा सकता है। इसमें कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) मददगार साबित होगी।

. आरामदायक कपड़े ही चुनें।

. मेडिटेशन और योग करें।

. कपड़ों को लेकर डर का सामना करें और खुद को उसके अनुसार बनाने की ही कोशिश करें।

. कपड़ों से अपना ध्यान भटकाएं इसके लिए आप चाहें तो फैमिली, फ्रेंड्स का सपोर्ट ले सकते हैं।

By tnm

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