भारत में साल-दर- साल ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में इजाफा होता जा रहा है। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी IARC-WHO, के अनुसार, भारत में साल 2022 में ब्रेस्ट कैंसर से 98,337 महिलाओं की मौत हुई थी। वहीं साल 2023 में भारत में 2,21,579 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले दर्ज किए गए थे। भारत में जिस दर से कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं, उसी दर से इस घातक बीमारी से जुड़े मिथक भी बढ़ रहे हैं। ब्रेस्ट कैंसर को लेकर एक यह मिथक भी है जो कपल्स इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के लिए कंसीव करते हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। क्या वाकई IVF ट्रीटमेंट करवाने से ब्रेस्ट कैंसरहोता है? आइए जानते हैं इस आर्टिकल के जरिए।

क्या IVF ट्रीटमेंट करवाने से होगा ब्रेस्ट कैंसर?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, आईवीएफ ट्रीटमेंट उन कपल्स के लिए एक बेहतर ऑप्शन है, जो नैचुरल तरीके से गर्भधारण नहीं कर पाते। यह एक आम धारणा है कि IVF ट्रीटमेंट करवाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है लेकिन यह बात पूरी तरह से मिथक है। कपल्स को ऐसा लगता है कि आईवीएफ ट्रीटमेंट के दौरान महिलाओं को ओव्यूलेशन बढ़ाने के लिए हार्मोनल ट्रीटमेंट और दवाईयां दी जाती हैं, जिसकी मदद से अंडाणु बनने में तेजी आती है। इस ट्रीटमेंट और दवाईयों के कारण कई लोग सोचते हैं कि इन हार्मोनल उतार-चढ़ाव से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है हालांकि असल मायनों में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब तक आईवीएफ और ब्रेस्ट कैंसर पर हुई रिसर्च में भी इन दोनों के बीच कोई कनेक्शन दर्ज नहीं किया गया है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईवीएफ ट्रीटमेंट के बाद ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, उस स्थिति में होता है, जब महिलाएं पहले से किसी तरह की समस्या से जूझ रही हों। इसके अलावा जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री रही है, उन्हें भी आईवीएफ या किसी भी अन्य हार्मोनल ट्रीटमेंट के बाद ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम हो सकता है।

कारण

ज्यादातर ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में इसके सटीक कारणों का पता लगाना मुश्किल है। ब्रेस्ट कैंसर पर अब तक जो रिसर्च सामने आई है कि उसमें महिलाओं को होने वाले ब्रेस्ट कैंसर के लिए हार्मोन, लाइफस्टाइल और कुछ मामलो में पर्यावरण में होने वाले बदलाव शामिल हैं।

लक्षण

ब्रेस्ट कैंसर होने पर नीचे बताए गए लक्षण नजर आ सकते हैं।

. स्तन या बगल में नई गांठ

. स्तन के किसी हिस्से का मोटा होना या सूजन

. स्तन की त्वचा में जलन या गड्ढे

. निप्पल क्षेत्र या स्तन में लालिमा या फिर पपड़ीदार त्वचा

. निप्पल का अंदर की ओर खिंचना या निप्पल क्षेत्र में दर्द

. स्तन के दूध के अलावा निप्पल से रक्त सहित अन्य स्राव

. स्तन के आकार या आकृति में कोई भी बदलाव

. स्तनों में दर्द महसूस होना

महिलाओं को अपने स्तन में गांठ या कोई अन्य बदलाव नजर आए तो उन्हें इस बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए। स्तनों में बनने वाली गांठ कैंसर या नहीं यह जानने के लिए डॉक्टर आपसे मैमोग्राम कराने के लिए कह सकते हैं। मैमोग्राम की रिपोर्ट के बाद ही यह बात साफ होगी कि स्तन में बनने वाली गांठ या अन्य किसी तरह का बदलाव कैंसर है या नहीं।

इलाज

ब्रेस्ट कैंसर का इलाज मुख्य रूप से सर्जरी के साथ किया जाता है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी शामिल है। वहीं, ब्रेस्ट कैंसर के गंभीर मामलों में कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी दोनों ही दी जाती हैं।

By tnm

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