हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्यों का असर हृदय पर पड़ता है। जब हम तेजी से दौड़ते हैं तो हार्ट भी तेजी से धड़कना शुरु कर देता है। स्ट्रेस, तनाव और घबराहट होने पर भी आपके हृदय की धड़कनों में बदलाव आ सकता है। इस तरह हृदय धड़कनों में बदलाव को साइनस एरिथमिया कहते हैं। इसमें व्यक्ति के सांस लेने और छोड़ने के दौरान हृदय की धड़कनों में बदलाव हो सकता है, हालांकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन, इसके बावजूद भी इसमें बदलाव हृदय रोग का संकेत हो सकता है। तो चलिए जानते हैं कि साइनस एरिथमिया के कारण और लक्षण क्या हैं।

साइनस एरिथमिया क्या है?

यह सांस लेने के साथ हृदय गति में होने वाले प्राकृतिक बदलावों को दर्शाता है। इसमें सांस लेने के दौरान हृदय गति या धड़कन तेज हो जाती है और सांस छोड़ने के दौरान धीमी हो जाती है। यह बदलाव ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम को नियंत्रित करने का सामान्य हिस्सा है फिलहाल तो इस स्थिति को एक नॉर्मल स्टेज माना जाता है हालांकि, यह कभी-कभी अन्य हृदय से जुड़ी अन्य समस्याओं की ओर संकेत करता है।

कारण

रेस्पिरेटरी बदलाव

यह रेस्पिरेटरी साइकिल से जुड़ा है। सांस लेने के दौरान, वैगल टोन कम होने के कारण हृदय गति में बढ़ोतरी होना और सांस छोड़ने के दौरान, हृदय गति कम होना। यह रेस्पिरेटरी संबंधी बदलाव युवाओं में सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं।

बुखार और इंफेक्शन

बुखार और इंफेक्शन की वजह से आपकी हार्ट बीट में बदलाव हो सकता है। बुखार और सूजन के कारण बनने वाले संक्रमण में हृदय की धड़कनों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

हृदय रोग

कुछ मामलों में यह हृदय रोग से संबंधित हो सकता है। हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर या अन्य रोगों में होने पर भी व्यक्ति की हार्ट बीट में बदलाव हो सकता है। हार्ट से जुड़ी समस्या हृदय कार्यों में बदलाव का कारण बन सकती है।

ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम एक्टिविटी

यह हृदय और ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के बीच की प्रतिक्रिया है। पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम का हिस्सा वेगस नर्व सांस छोड़ने के दौरान हृदय गति को धीमा कर देती है, जबकि सिम्फेटिक नर्वस सिस्टम सांस लेने के दौरान हृदय गति को बढ़ा सकता है। यह प्राकृतिक उतार-चढ़ाव साइनस एरिथमिया का कारण बन सकता है।

आयु और शारीरिक स्थिति

साइनस एरिथमिया युवा और स्वस्थ व्यक्तियों में ज्यादा आम है और उम्र के साथ यह कम होती जाती है। बच्चे और युवा अक्सर अधिक स्पष्ट साइनस एरिथमिया महसूस करते हैं। यह स्वस्थ धड़कन रोगों के चलते बदल सकती है।

लक्षण

. घबराहट
. चक्कर
. सांस लेने में तकलीफ
. थकान महसूस होना आदि।

इस बात को न करें इग्नोर

हृदय से जुड़ी समस्याओं को आप नजरअंदाज न करें। हृदय की धड़कनों में बदलाव होना हार्ट से जुड़ी समस्याओं जैसे हार्ट फेलियर व हार्ट अटैक का कारण हो सकता है। ऐसे में आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और डॉक्टर के द्वारा बताए टेस्ट को जल्द से जल्द कराएं।

By tnm

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