आयुर्वेद चिकित्सा एक ऐसी पुरानी प्रणाली है जिसका प्रयोग शरीर में संतुलन और सद्भाव को बढ़ावा देने और रोगों को ठीक करने के लिए हजारों सालों से किया जा रहा है। वर्तमान में अमेरिका में यह एक वैकल्पिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धति है। आयुर्वेद के अनुसार, पांच तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) जो मिलकर तीन दोष और कार्यात्मक ऊर्जा बनाते हैं। वात(वायु और आकाश के संयोजन से बनी गति की ऊर्जा), पित्त (अग्नि और पानी मिलकर चयापचय की ऊर्जा बनाते हैं) और कफ ( पृथ्वी और पानी मिलकर सामांजस्य की इस ऊर्जा को बनाते हैं)। गर्भाधान के समय ये ऊर्जाएं हमारी संरचना कार्य, समानताएं और प्रवृत्तियों के जरिए हमारे संविधान को संयोजित और नियंत्रित करती हैं। मन साफ, हल्का और आनंदित है तो इसका अर्थ है कि सत्वगुण धारण करता है। शरीर में रजस (महत्वाकांक्षा, बैचेनी, चिड़चिड़ापन और बुखार) या तमस (भारीपन और सुस्ती) होने पर यह संतुलन से बाहर हो सकता है। ये गुण या गुण बदलते रहते हैं। उदाहरण के लिए हमें जागने के लिए रजस और सोने के लिए तमस की जरुरत होती है। तो चलिए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि योग और ध्यान के जरिए दोषों को कैसे बैलेंस किया जा सकता है और सारे स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखा जा सकता है।
योगा और ध्यान
दोषों को संतुलित करने और आपके स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए योग और ध्यान प्रत्येक दोष के अपने विशिष्ट गुण और विशेषताएं है और किसी भी दोष में यदि असंतुलन हो जाए तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

आयुर्वेद और योग
यह दोनों आपस में जुड़े हुए हैं क्योंकि दोनों शरीर में संतुलन और सामंजस्य के महत्व पर जोर देते हैं। इन दोनों की उत्पत्ति वेदों में हुई है। आयुर्वेद दोषों को संतुलित करने, ऑवरऑल हेल्थ और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए योग का इस्तेमाल होता है। प्राणायाम से लेकर आसन और ध्यान तक योग के सभी आठ अंगों को विशिष्ट असुंतलन को इकट्ठा करने के लिए अनुकूलित किया गया है यह मन शांत करता है और तनाव को कम करता है।
ध्यान और आयुर्वेद
स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए दोषों को संतुलित करने के लिए ध्यान एक और शक्तिशाली उपकरण माना जाता है। यह तनाव को कम करता है। मूड बेहतर करता है और मानसिक स्पष्टता और फोकस बढ़ाता है। कई बीमारियां मनोदैहिक होती हैं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती हैं या फिर बढ़ा सकती हैं। ध्यान आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक शक्तिशाली उपकरण है। मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर प्रतिरक्षा समारोह की निकटता से जुड़ा हुआ है इसके नियमित ध्यान के अभ्यास के जरिए बहाल किया जाता है।
आयुर्वेद के तीन दोष
आयुर्वेद में तीन तरह के दोष होते हैं वात, पित्त और कफ। हर दोष की अपनी अपनी क्वालिटी होती है।
वात
गुण
सूखा, हल्का, ठंडा, खुरदरा और गतिशील।
असंतुलन
चिंता, अनिद्रा, कब्ज और ड्राई स्किन
कैसे करें कंट्रोल
ऐसे व्यायाम करें जो धीरे हों और ग्राउंडिंग के जरिए किए जाएं। गहरी सांस लेकर बैठकर ध्यान करें। गर्म पौष्टिक खाद्य पदार्थ और पेय जैसे सूप और हर्बल चाय। नाक के जरिए धीमी, गहरी सांस लें।
ये पोज करें
. माउंट पोज (ताड़ासन)
. वॉरियर 2 (वीरभद्रासन)
. ट्री पोज (वर्करासन)

. कैमल पोज (उष्ट्रासन )
. सीट्ड फॉरवॉर्ड फोल्ड ( पश्चिमत्तोसना)
. कॉर्पस पोज (सर्वासना)
पित्त
गुण
गर्म, तीखा, हल्का और तैलीय खाना न खाएं
असंतुलन
एसिड रिफ्लक्स होना, त्वचा पर चकत्ते और गुस्सा
ऐसे करें कंट्रोल
ठंडा और शांत करने वाले पोज जैसे आगे की ओर मोड़ना और हल्का मोड़ना, सांस लेने की तकनीकें जो शीतलन और विश्राम पर जोर दें जैसे वैकल्पिक नासिका श्वास। ऐसे आहार खाएं जैसे खीरे, तरबूज, हाइड्रेटिंग खाद्य पदार्थ खाएं।
ये पोज करें
उत्तानासन
बालासन
त्रिकोणासन
मारीच्यासन
सलम्बा सर्वांगासन
सवासना
कफ
गुण
भारी, धीमा, स्थिर और तैलीय
असंतुलन
वजन बढ़ना, सुस्ती, डिप्रेशन
ऐसे करें कंट्रोल
एक्टिव और एनर्जेटिक रखने वाले पोज जैसे सूर्य नमस्कार, ऊर्जा और गर्मी बढ़ाने के लिए ब्रीथ ऑफ फायर ब्रीथिंग तकनीक ऐसे आहार खाएं जिसमें अदरक और लाल मिर्च जैसे मसालेदार और उत्तेजक खाद्य पदार्थ खाएं।
ये पोज करें
सूर्य नमस्कार
वीरभद्रासन

नवासन
सेतुबंधासन
हलासन
सवासना
आयुर्वेद को योग और मेडिटेशन के साथ ऐसे करें
नियमित प्रैक्टिस योगा और मेडिटेशन के जरिए आप इन तीनों दोषों को कंट्रोल कर सकते हैं। इसके अलावा इन तीनों पोज को संतुलित करने के लिए आप आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स की सलाह ले सकते हैं। इन तीनों को बैलेंस करके आप हेल्दी और फिट रह सकते हैं।
