कई बार आपने देखा होगा कि मौसम में बदलाव होने के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी आदि की समस्याएं होने लगती हैं। वहीं कुछ लोगों को ठंड लगने के कारण कान में दर्द की परेशानी भी उठानी पड़ती है। हालांकि, समय के साथ-साथ यह समस्याएं अपने आप ठीक भी हो जाती हैं। इसलिए, इसको लेकर अक्सर लोग ज्यादा परेशान नहीं होते लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि किसी को लंबे समय से कान में दर्द हो रहा है तो इसको अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक कान में दर्द होना ईयर ट्यूमर का लक्षण भी हो सकता है। तो चलिए आज इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं पूरी जानकारी।
ईयर ट्यूमर क्या है?
ईयर ट्यूमर कान के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसमें कान का बाहरी, अंदरूनी और बीच का हिस्सा शामिल होता है। आमतौर पर कान के ट्यूमर ज्यादा सॉफ्ट और नॉन कैंसेरियस होते हैं। लेकिन, इसके कारण सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी तरह का ट्यूमर आपके कान में नजर आ रहा है, लेकिन कोई लक्षण उभरकर नहीं आ रहा हैं, तो ऐसी कंडीशन में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती। हां, यदि लक्षण दिखे, तो इसको अनदेखा न करें। आपको बता दें कि ईयर ट्यूमर टिश्यूज की असामान्य ग्रोथ को कहते हैं जो कि गांठ की तरह दिखता है और ये कान में या इसके आसपास बनता है।

ईयर ट्यूमर के लक्षण
ईयर ट्यूमर कान के किस हिस्से में हुआ है, इसी आधार पर इसके लक्षण नजर आते हैं। लेकिन, कुछ सामान्य लक्षण दिखते हैं, जैसे-
. कान के बाहरी हिस्से में उभार आना
. चक्कर आना या बैलेंस बनाने में दिक्कत होना
. कान से खून आना या किसी खास किस्म का फ्लूइड रिसना

. कान में दर्द होना
. सिर दर्द होना
. सुनने की क्षमता कमजोर होना
. कान में घाव होना, जिसकी रिकवरी में ज्यादा समय लगना
. कान के आसपास की स्किन का रंग बदल जाना और नए मस्से उभर आना
. लिम्फ नोड्स में सूजन
. कान बजने की समस्या होना
. चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
ईयर ट्यूमर के कारण
कान में ट्यूमर तब होता है, जब आपका शरीर तेजी से कुछ नए सेल्स बनाने लगता है, जो कि किसी गंठ की तरह उभरने लगते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि पुराने सेल्स भी उतनी तेजी से डेड नहीं होते हैं, जितनी तेजी से होने चाहिए। पुराने और नए सेल्स भी मिलकर ट्यूमर का निर्माण कर सकते हैं। इस तरह, ईयर ट्यूमर बनने की संभावना हो सकती है। वहीं यदि कैंसेरियस ईयर ट्यूमर की बात करें, तो जब सेल्स अनियंत्रित तरीके से बढ़ते हैं तब यह बीमारी होती है। ये सेल्स एक ही जगह में तेजी से फैल सकती हैं। ऐसे में इसका इलाज करवाया जाना चाहिए।
ईयर ट्यूमर का इलाज
ईयर ट्यूमर का इलाज उसके कारण और लक्षणों पर निर्भर करता है। यदि ईयर ट्यूमर नॉन-कैंसेरियस है तो इसके इलाज की जरूरत नहीं होती क्योंकि यह सामान्यत किसी परेशानी का कारण नहीं होता है। वहीं, यदि ईयर ट्यूमर की वजह से सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगी है तो डॉक्टर जरूरी ट्रीटमेंट कर सकते हैं। जैसे, ईयर ट्यूमर को रिमूव करने के बारे में सोचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसके अन्य लक्षणों पर भी गौर किया जाता है। वहीं, इस तरह के प्रोसीजर को फॉलो करने के लिए रेडिएशन की हाई डोजेज दी जाती हैं, ध्यान रखें प्रक्रिया सर्जरी नहीं कहलाती है।

कुल मिलाकर, कहने की बात ये है कि ईयर ट्यूमर घातक समस्या नहीं है। इसके बावजूद, इसके लक्षणों पर नजर रखी जानी चाहिए। यदि किसी वजह से ईयर ट्यूमर के कारण सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर अपना इलाज करवाएं। ईयर ट्यूमर के इलाज के लिए सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी अपनाई जा सकती है।
