हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है, जिसमें पैक्ड फूड पर फ्रंट ऑफ पैकेज लेबलिंग (FOPL) लागू करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि भारत में तेजी से बढ़ते डायबिटीज के मामलों को देखते हुए यह बेहद जरूरी हो गया है कि उपभोक्ताओं को यह जानकारी दी जाए कि वे जो पैक्ड फूड खरीद रहे हैं, उसमें कितना शुगर और फैट शामिल है। इससे उपभोक्ताओं को उनके स्वास्थ्य के लिए उचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
FSSAI की तरफ से मिल चुकी है FOPL को मान्यता
याचिकाकर्ता के वकील राजीव शंकर द्विवेदी ने इस मुद्दे को पब्लिक हेल्थ के नजरिए से बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि कई देशों में जंक फूड के सेवन पर सख्त प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, जबकि भारत में अभी भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने बाकी हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) पहले ही FOPL को मान्यता दे चुका है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे
याचिककर्ता ने कहा कि देश में डायबिटीज तेजी से बढ़ रहा है और इसे एक साइलेंट महामारी के रूप में देखा जा रहा है। इस बीमारी के कारण हेल्थकेयर सिस्टम पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बच्चों में कुपोषण और मोटापे की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। तीन में से एक बच्चा कुपोषण का शिकार है, और पांच साल से कम उम्र के बच्चों में भी मोटापा जैसी गंभीर समस्या देखी जा रही है।
27 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का निर्देश
आपको बता दें कि याचिका में यह मांग की गई है कि सरकार जल्दी से जल्दी FOPL को लागू करे ताकि लोग जागरूक हो सकें कि वे क्या खा रहे हैं और इसके उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करते हुए केंद्र और राज्यों को 27 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद इस मामले पर आगे की सुनवाई होगी। वहीं यह कदम भारतीय खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण पहल है, और अगर इसे लागू किया जाता है तो इससे उपभोक्ताओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे भारत में बढ़ते डायबिटीज और मोटापे की समस्याओं से निपटने में भी सहायता मिलेगी।
