गर्मी का अभी भी कहर जारी है। ऐसे में लोगों को कई तरह की बीमारियां घेर रही हैं। वहीँ इस गर्मी का असर महिलाओं पर भी पड़ रहा है। बता दें इतनी अधिक चिलचिलाती गर्मी मासिक धर्म स्वास्थ्य और चक्र को प्रभावित करती है। लेकिन शायद ही आपने इस बारे में कभी सोचा हो। बता दें मौसमी बदलाव, विशेष रूप से गर्मी, एक महिला की मेन्स्त्रुअल साइकिल को बाधित करती है। इतना ही नहीं डीहाइड्रेशन से भी मासिक धर्म इफ़ेक्ट होता है। इस कारण शरीर भी detox होने में सक्षम नहीं हो पाता है। आइए उन अन्य तरीकों पर नजर डालें जिनसे तापमान में वृद्धि मासिक धर्म को प्रभावित कर सकती है।

सूजन और थकान

अधिक तापमान से शरीर में थकान और सुस्ती बनी रहती है। जो आमतौर पर मासिक धर्म के दौरान अनुभव होती है। थकान के अलावा, वॉटर रिटेंशन के कारण सूजन भी बढ़ सकती है। तनाव की वजह से लक्षण और भी तीव्र हो जाते हैं।

सिरदर्द

गर्म दिन में सैनिटरी पैड पहनना बहुत असुविधाजनक महसूस कराती है। वहीँ जब बॉडी में डीहाइड्रेशन होने लगता है तो सिरदर्द जैसे प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) के लक्षण महसूस होने लगते हैं।

मुंहासे निकला आना

आपके मासिक धर्म चक्र पर हीटवेव का एक और प्रभाव पड़ता है जिसके कारण फेस पर मुंहासे निकल आ आते हैं। लगातार पसीना आने और हार्मोनल बदलाव के कारण समस्या और बढ़ जाती है, जिससे आपको सुस्ती और चिड़चिड़ापन भी महसूस हो सकता है।

इन्फेक्शन होने का खतरा

गर्म मौसम या हवा में बढ़ी हुई नमी से आपको यीस्ट संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मौसम बैक्टीरिया की अत्यधिक वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।

तनाव होना

गर्मी और पीरियड्स होने पर तनाव का स्तर बढ़ने लगता है। जिससे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है। ये हार्मोन पीरियड्स को नियमित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

By tnm

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