गर्मी इतनी ज्यादा पड़ रही है कि इसका असर इंसानों के साथ साथ जानवरों पर भी पड़ रहा है। उत्तर भारत में चलने वाली गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर का सारा पानी सोख रही है। वहीँ गर्मियों के दौरान, डॉक्टर लू से बचने के लिए जितना संभव हो उतना पानी पीने की सलाह भी दे रहे हैं। हालांकि कई बार पानी का असर भी बेअसर हो रहा है। अब ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर मानव शरीर में कितना तापमान सहन करने की क्षमता है। तो आइए इसी बारे में जानते हैं।
आपको बता दें डॉक्टरों के मुताबिक इंसान का शरीर 37.5 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान झेलने में सक्षम होता है। गर्मी हो या सर्दी, शरीर का आंतरिक तंत्र तापमान को 37.5 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखने का काम करता है। बता दें मस्तिष्क के पीछे का भाग जिसे हाइपोथैलेमस कहते हैं, शरीर के अंदर के तापमान को कण्ट्रोल करने का काम करता है। मानव शरीर को 37.5 डिग्री सेल्सियस पर कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अगर तापमान 2-4 डिग्री ऊपर-नीचे हो जाये तो शरीर को ज्यादा दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगर इससे ज्यादा हो तो दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
शरीर गर्मी को किस तरह से कण्ट्रोल करता है
दरअसल हमें जब बहुत अधिक पसीना आता है और जब हम मुंह से सांस लेते हैं तो शरीर के अंदर का तापमान नियंत्रित होने लगता है
जब आपको गर्मी लगती है और आप किसी खुली, हवादार जगह पर जाते हैं तो यह शरीर के अंदर के तापमान को नियंत्रित करता है
जब शरीर का तापमान बढ़ता है तो रक्त वाहिकाएं चौड़ी होने लगती हैं और रक्त शरीर के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुंचने लगता है
शरीर कितनी गर्मी झेलने में सक्षम है
जब हमारे शरीर द्वारा गर्मी सहन करने की बात आती है तो कई बातों पर सोचा जाता है कि आप कितने समय तक उस तापमान के संपर्क में रहे हैं, मौसम, पसीना, शारीरिक गतिविधियों और कपड़ों में कितनी नमी है
ये सभी चीजें शरीर के बढ़े हुए तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद करने का काम करती हैं। तेज धूप और लू से बचने के लिए खूब पानी पीना चाहिए। वहीँ तेज धूप के संपर्क में आने से बचना चाहिए। नमी होने पर बहुत पसीना आता है इसलिए जितना हो सके उतना पानी पियें। तेज धूप के अचानक संपर्क में आने से बचें। इससे बुखार जैसी स्थिति या हाइपरथर्मिया का खतरा बढ़ सकता है। । यदि तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है, तो शरीर इसे आसानी से समायोजित कर लेता है।
