जहाँ एक अतराफ़ गर्मी बहुत ज्यादा पड़ रही है। वहीँ मौसम कब बदल रहा है इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है। दरअसल बीते दिनों मौसम ने ऐसी करवट ली और उत्तरी भारत के कई इलाकों में तेज आंधी तूफ़ान आया। तूफानी हवाओं की वजह से कई इलाकों में धूल के कण बढ़ गए। इससे कई लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बता दें इसके चलते अस्पतालों में अस्थमा और सांस की दूसरी बीमारियों के मर्जों की संख्या काफी बढ़ गयी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आंधी के कारण थंडरस्टॉर्म अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत है। आइए आपको बताते हैं कि थंडरस्टॉर्म अस्थमा क्या होता है।
आपको बता दें थंडरस्टॉर्म अस्थमा एक ऐसी कंडीशन है जिसमें आंधी के बाद हवा में अचानक से एलर्जी पैदा करने वाले कणों की मात्रा बढ़टी है जिसके कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी, खांसी, सीने में दर्द और घरघराहट जैसे परेशानी होती है। वहीँ पेशेंट के लिए ये बहुत कह्तारानाक होता है। इसके अलावा बच्चों में भी इसकी वजह से परेशानी देखने को मिलती है। ऐसे में बचाव कसी करें ये जानना जरूरी है।
सबसे ज्यादा खतरा किसको
थंडरस्टॉर्म अस्थमा के कारण उन लोगों को ज्यादा परेशानी होती है जो लोग पहले से ही अस्थमा और सांस की समस्या से पीड़ित होते हैं। जिन लोगों को धूल-मिट्टी, महीन कचरे के कणों से काफी दिक्कत होती है। वहीँ हार्ट के मरीजों में भी इसकी परेशानी बढ़ जाती है। इसका असर गर्भवती महिलाओं की सेहत पर भी पड़ता है। इसके धूल के कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाते हैं और एलर्जी का कारण बनते हैं।
बचाव के लिए क्या करना चाहिए
अब अगर ऐसा मौसम होता है तो बाहर जाने का प्लान बिलकुल भी न बनाये। अस्थमा पेशेंट ऐसे मौसम में घर में ही रहे। ताकि धुल मिटटी के कणों से आपको कोई दिक्कत न हो। अगर तो भी जाना जरूरी हो तो मास्क पहन कर ही जाएँ। मास्क से बचाव काफी हद तक होगा। अपनी अस्थमा की दवाएं हमेशा साथ रखें। अगर आप असथ्मा की मेडिसिन लेने ते हैं तो यूज़ घर से बाहर जाते समय न भूलें। वहीं बुजुर्ग मरीज बाहर जानें से पहले सावधानी बरतें। इसके अलावा कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर को दिखा लें।
