दुनिया में इन दिनों एमपॉक्स तेजी से फैल रहा है। एमपॉक्स ने भारत में भी दस्तक दे दी है। भारत में एमपॉक्स का एक संदिग्ध मरीज मिला है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि कर दी है। जानकारी की मानें तो हिसार के 26 साल युवक में एमपॉक्स के लक्षण नजर आए हैं। पिछले दिनों वह बाहर से यात्रा करके भारत आया था, जिसके बाद उसमें एमपॉक्स के क्लेड-2 के लक्षण दिखाई दिए थे। भारत में एमपॉक्स का यह पहला मामला सामने आया है। मरीज को आइसोलेट करके दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। एमपॉक्स एक संक्रमित व्यक्ति के करीबी संपर्क में आने से फैल सकता है। लोगों के मन में एमपॉक्‍स को लेकर तरह-तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। एक सवाल हमें गूगल पर म‍िला क‍ि क्‍या एमपॉक्‍स का इलाज एंटीबायोट‍िक्‍स के जर‍िए संभव है? तो आइए जानते हैं कि क्या इसका इलाज एंटीबायोटिक्स के जरिए संभव है।

एमपॉक्स का इलाज एंटीबायोट‍िक्‍स के जर‍िए संभव है

एक्सपर्ट्स की मानें तो एमपॉक्स का इलाज एंटीबायोटिक्स के जरिए संभव नहीं है, क्योंकि एमपॉक्स एक वायरल संक्रमण है। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरियल इंफेक्‍शन के इलाज में असरदार होते हैं, जबकि वायरस पर इनका कोई असर नहीं होता। केवल तब एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ती है, जब कोई बैक्टीरियल सेकेंडरी संक्रमण हो जाए। एमपॉक्स एक वायरल बीमारी है, इसलिए इसे एंटीबायोटिक्स से ठीक नहीं किया जा सकता। एंटीबायोटिक्स खासतौर से बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए डिजाइन की गई दवाएं हैं, और वायरस के खिलाफ ये काम नहीं कर सकती। वायरस एक अलग प्रकार के पैथोजन होते हैं जिनका जीवन चक्र बैक्टीरिया से बिल्कुल अलग होता है। जब किसी व्यक्ति को वायरल संक्रमण होता है जैसे कि एमपॉक्स तो एंटीबायोटिक्स से उस वायरस को कोई नुकसान नहीं होता।

एमपॉक्स का इलाज

एमपॉक्स के इलाज में लक्षणों को कंट्रोल करने के ल‍िए अलग-अलग उपायों की मदद ली जाती है। एमपॉक्‍स में बुखार को कंट्रोल करने के ल‍िए पेरासिटामोल दी जाती है। कुछ मामलों में, जब व्‍यक्‍त‍ि को गंभीर इंफेक्‍शन हो जाता है तो डॉक्‍टर एंटीवायरल दवाओं की मदद लेते हैं। इसके अलावा एमपॉक्स के इलाज के ल‍िए शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी जाती है। यदि त्‍वचा पर फफोले या घाव हो जाते हैं तो डॉक्‍टर एंटीसेप्टिक क्रीम या लोशन लगाने की भी सलाह देते हैं।

एमपॉक्‍स में बैक्‍टीर‍ियल दवाईयां

एमपॉक्स का इलाज एंटीबायोटिक्स से नहीं किया जा सकता, लेक‍िन कुछ मामलों में यह देखा गया है कि वायरल संक्रमण के दौरान त्वचा पर फफोले या घाव हो जाते हैं। यदि इन घावों में बैक्टीरियल इंफेक्‍शन हो जाता है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एंटीबायोटिक्स एमपॉक्स वायरस को खत्म करने के लिए नहीं बल्कि उस बैक्टीरिया को कंट्रोल करने के लिए दिए जाते हैं जो घाव में इंफेक्‍शन पैदा कर सकता है। एंटीबायोटिक्स का ज्‍यादा इस्‍तेमाल शरीर में एंटीबायोटिक प्रतिरोधक विकसित कर सकता है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध का मतलब है कि बैक्टीरिया, एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोध करने लगते हैं, इससे एंटीबायोटिक दवाएं कम असरदार हो जाती हैं जो भविष्य में गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज को मुश्‍क‍िल बना देता है।

By tnm

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