आज कल के खान पान और लाइफस्टाइल को देखते हुए हर दूसरे इंसान को घुटनों से जुडी समस्या है। पहले टाइम में ये समस्या बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, लेकिन आज कल युवां भी इसके शिकार हो रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर भी मरीज को knee रिप्लेसमेंट की सलाह देते हैं। तो आज इसी के बारे में जानते हैं कि आपको कब इस सर्जरी के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
फॉर्टिस अस्पताल के डॉक्टर ने बताया
आपको बता दें दिल्ली के फॉर्टिस अस्पताल, वसंत कुंज में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख निदेशक डॉ. गुरिंदर बेदी का कहना है कि अब घुटने की पूरी रिप्लेसमेंट सर्जरी भी मौजूद है। वहीँ दुनियाभर में लाखों लोग इसका लाभ उठारहे हैं। और घुटनों के दर्द से छुटकारा पाकर एक बेहतर जीवन जी रहे हैं। लेकिन Knee Replacement Surgery करवाने की जरूरत हर व्यक्ति को नहीं होती है , इसके बारे में जानना बेहद जरुरी है।
Knee Replacement Surgery कब करवाएं
आपको बता दें कोई भी फिजिकल एक्टिविटी करते समय घुटनों में तेज दर्द का होना
घुटनों में दर्द की वजह से रोजमर्रा के काम, जैसे- नहाना, कपड़े बदलना, कार में बैठने या उतारने में तकलीफ का होना
घुटनों के दर्द के लिए फिजियोथेरेपी, इंजेक्शन, ब्रेसेज और सप्लीमेंट्स जैसे इलाज करवाने पर भी आराम न आना
घर से बाहर जाकर सामान लाने, सीढ़ियों चढ़ने उतरने में तकलीफ होना
घुटनों के दर्द से राहत पाने के लिए अक्सर पेन किलर लेना
संतुलन न बना पाना
दर्द की वजह से सोने में तकलीफ महसूस होना।
वहीँ अगर घुटनों में दर्द और सूजन लगातार बनी रहती है, और आराम या दवाइयों के बावजूद ठीक नहीं हो रहा है तो इसका मतलब है कि जोड़ों को काफी ज्यादा नुकसान हो चुका है और अब सर्जरी की जरूरत है। घुटनों के जोड़ कमजोर होने की वजह से पैर भी बो-शेप (bow shape) के होने लगते हैं। जिससे कंडीशन लगातार खराब होती चली जाती है। ऐसे में सर्जरी की मदद से इसे ठीक करना है एक बेटर आप्शन है।
अन्य आप्शन की तरफ रुख
सर्जरी से पहले कई दूसरे ट्रीटमेंट की मदद ली जाती है जैसे फिजिकल थेरेपी, दवाइयां, इंजेक्शन और लाइफस्टाइल में बदलाव का होना। अगर इससे भी दर्द में आराम नहीं मिल पा रहा है तो तो नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी का ही ऑप्शन रह जाता है।
सर्जरी के पहले इन बातों का ध्यान रखने की जरूरत है
मरीज को आर्थोपेडिक सर्जन से मिलकर अच्छे से जांच करवानी चाहिए। जिसमें जोड़ों को कितना नुकसान पहुंचा है इसकी जांच करने के लिए, शारीरिक परीक्षण, एक्स-रे और कुछ मामलों में एमआरआई भी किया जाता है।
कितने तरह के होते हैं नी-रिप्लेसमेंट?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी अलग-अलग तरह की होती हैं, जिसमें पूरी तरह से घुटनों को रिप्लेस करना और घुटनों को आंशिक तौर पर रिप्लेस करना शामिल है। सर्जरी किस तरह की होनी है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज का आर्थराइटिस कितना ख़राब हो चूका है।
सर्जरी के बाद रिकवरी कैसे करें
सर्जरी के बाद फिजिकल थेरेपी बेहद जरूरी हो जाती है, ताकि जोड़ों को खोई ताकत वापस मिल सके। चलना-फिरना फिर से अच्छे से शुरू हो सके। पूरी तरह से रिकवर होने में महीनों का समय लग जाता है। बहुत से लोग ऐसा नहीं करते हैं और फिर परेशान होते हैं। जबकि knee रिप्लेसमेंट होने के बाद मरीज को हर बात का ध्यान रखने की जरूरत है।
