कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पानी में जाने से बहुत डर लगता है। गहरी नदी या फिर बड़ा समंदर देखते ही वह पानी से दूरी बना लेते हैं। अगर आप भी ऐसा महसूस करते हैं तो यह एक्वाफोबिया का लक्षण हो सकता है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति के अंदर एक ऐसा गहरा डर होता है। ऐसे व्यक्ति के अंदर एक गहरा डर होता है जब भी वह पानी के पास जाता है तो उसका दिल तेजी से धड़कने लग जाता है, हाथों में पसीना आने लगता है और सांसे भी तेज हो जाती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति समुद्र की लहरों से भी डर जाता है, वहीं कुछ लोगों को तो पानी से नहाते हुए भी पैनिक अटैक आने लगते हैं। यह एक ऐसा डर है जो काम करने का तरीका भी रोक सकता है और रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियां खड़ी कर सकता है।
ऐसे करें अपना बचाव
पानी का सामना करें
इससे अपना बचाव करने के लिए पूल के गहरे छोर पर एक हाथ से पूल की रेलिंग पकड़ लें। फिर दूसरे हाथ के साथ अपनी नाक दबाएं और धीरे-धीरे अपना चेहरा पानी में डुबोएं। जब तक तनाव और डर दूर न हो जाए तब तक अपना चेहरा पानी में डूबाना जारी ही रखें। जब आप अपने चेहरे को पानी के नीचे रखकर थोड़ा सहज महसूस करते हैं तो अपनी नाक को दबाएं। बिना पानी के नीचे बुलबुले उड़ाने का प्रयास करें ऐसे ही धैर्य रखकर आप अपने एक्वाफोबिया पर काबू पा सकते हैं।
छोटे लक्ष्य निर्धारित करें
पानी के संपर्क से संंबंधित अपने लिए छोटे और प्राप्त करने लायक योग्य लक्ष्य निर्धारित करें। फिर अपनी प्रगति के लिए खुशी मनाएं और पहचानें की एक्वाफोबिया पर काबू पाना आसान होता है। उदाहरण के तौर पर आप जैसे अपना पहला लक्ष्य कुछ मिनटों के लिए बिना किसी डर के छोटे पूल के पास खड़े हो सकते हैं। ऐसे ही छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करके अपना बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
पानी में जाते हुए पैनिक न करें
धीरे-धीरे पूल के अंदर जाएं और अपने शरीर को पानी के एहसास की आदत डालते हुए डर का सामना करें। पूल में अंदर की ओर धीरे-धीरे कदम रखें फिर घुटने तक पानी में खड़े हो जाएं। एक बार जब आप पूल के बीच में पहुंच जाएंगे तो अपनी त्वचा पर पानी के एहसास पर भी ध्यान दें। जब तक आप शुरुआती तनाव, घबराहट और डर से मुक्त नहीं होते तब तक धीरे-धीरे टहलते रहें। घुटने तक पानी में सहज होने के बाद धीरे-धीरे कमर तक और फिर छाती तक पानी में जाएं। इससे भी आपकी घबराहट दूर होगी।
नेगेटिव विचारों से दूर रहें
पानी को लेकर यदि आपके मन में कोई नेगेटिव विचार आता है तो उन्हें चुनौती दें और समझने की कोशिश करें। अक्सर एक्वाफोबिया से पीड़ित व्यक्ति के मन में पानी का खतरा या फिर उसके पास होने से निपटने की क्षमता के बारे में बेमतलब के विचार आते हैं। ऐसे में विचारों का मुकाबला करने के लिए पॉजिटिव ही सोचें।
