कहते हैं आंखों का हमारी जिंदगी में बहुत ही इम्पोर्टेन्ट रोल है। हर चीज को देखने के लिए आंखें ही है जो बताती है कि कौन सी चीज कितनी खूबसूरत है। वहीँ अगर आंखें ख़राब हों तो कई दिक्कतें होती हैं। बता दें की आँखों से जुडी कई तरह की परेशानियं हो सकती हैं जिनमे आंखों में होने वाला ब्लैक फंगस काफी आम है। जिसका इलाज करवाने के लिए काफी खर्चा हो जाता है। लेकिन अब ब्लैक फंगस के इलाज के लिए ज्यादा जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। दरअसल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने केवल 30 रुपए की गोली से ब्लैक फंगस के रोग को ठीक करने का उपचार ढूंड निकाला है। इस यूनिवर्सिटी नीक ऐसी गोली निकाली है जिसकी मदद से ब्लैक फंगस का इलाज संभव है।
इट्राकोनोजोल दवा है लाभदायक
आंखों के ब्लैक फंगस संक्रमण को ठीक करने के लिए इट्राकोनोजोल नाम की दवा कारगर साबित हुई है जिसके चलते केजीएमयू के इस सफल शोध के बाद जर्नल स्प्रिंगर ने इसे पब्लिश किया है। वहीं केजीएमयू संक्रामक रोग के चीफ डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि कोविड के दौरान जब कोरोना मरीज का ट्रीटमेंट होता था या जो मरीज सही हो जाते थे तो उन मरीजों में ब्लैक फंगस की दिक्कतें हो रही थी क्योंकि इस दौरान इलाज के लिए कई तरह के स्टेरॉइड का इस्तेमाल किया जाता था।
ब्लैक फंगस के इलाज में यूज़ होने वाली मेडिसिन महंगी
ब्लैक फंगस बीमारी में इलाज के लिए एंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी कीमत लगभग दो हजार रुपए होती है। इसके अलावा दो और दवाएं भी बाजार में उपलब्ध हैं जिनमें पोसाकोनाजोल और इसावुकोनोजोल शामिल है। पोसाकोनाजोल टैबलेट 450 रुपए तक मिलती है। लेकिन वहीं इसावुकोनोजोल की एक गोली की कीमत 5800 रुपए के आसपास होती है। डॉ. हिमांशु ने बताया कि रिसर्च के वक्त फंगल इंफेक्शन के मरीज को इट्राकोनोजोल दवा 6 महीने तक दो-दो गोली रोज खाने के लिए दी गई, इसके आश्चर्यजनक नतीजे सामने आए और मरीज के आंख में मौजूद ब्लैक फंगस बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई और वह स्वस्थ हो गया।
ब्लैक फंगस होता क्या है
ब्लैक फंगस आंखो में होने वाला एक तरह का इन्फेक्शन होता है। यह म्यूकोर मोल्ड के संपर्क में आने के कारण होता है जो आमतौर पर मिट्टी, पौधों, खाद और सड़ते फलों और सब्जियों में पाया जाता है। ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगस हमारे शरीर में चले जाते हैं। इससे चेहरे पर सूजन, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी, बुखार, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना शामिल है।
