आपको शायद यह जानकर हैरान होगी कि प्रीमेच्योर बर्थ और माइक्रोप्लास्टिक पॉल्यूशन में कनेक्शन है। यह खुलासा हाल ही की रिसर्च के दौरान हुआ है। रिसर्च में सामने आया कि प्लास्टिक पॉल्यूशन और समय से पहले जन्मे बच्चों में खास कनेक्शन हो सकता है। ऐसे में इसके कारण आने वाले समय में चिंता बढ़ सकती है। रिसर्च में यह बताया गया है कि प्लास्टिक पॉल्यूशन जिसको सब लोग मामूली सा कण मानते हैं कैसे वह दिन पर दिन हमारी ओवरऑल हेल्थ पर असर हो रहा है। रिसर्चर ने यह भी बताया है कि समय से पहले जन्मे बच्चों के प्लेसेंटा में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के कण मिल रहे हैं ऐसे में इसके कारण कई तरह की परेशानी हो सकती है।
स्टडी में शामिल किए गए प्रीमेच्योर बच्चे
यह शोध डेनवर में किया गया है। इसमें प्रेग्नेंसी संबंधी समस्याओं में प्लास्टिक प्रदूषण की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में ह्यूस्टन एरिया में जन्मे हुए प्रीमेच्योर बच्चों को शामिल किया गया। इसमें 1900 प्लेसेंटा और समय से पहले जन्मे से 75 प्लेसेंटा का विश्लेषण किया गया। समय से पहले जन्मे बच्चों के प्लेसेंटा में टिश्यूज के प्रति ग्राम 203 माइक्रोग्राम प्लास्टिक मिली जो कि पहले जन्मे बच्चों के प्लेसेंटा में 130 माइक्रोग्राम से भी 50% ज्यादा है।

दिमाग में पहुंच रही है प्लास्टिक
अध्ययन में 12 तरह की प्लास्टिक का पता पीईटी के जरिए लगाया गया। बोतलों में इस्तेमाल होने वाली सबसे आम तरह की प्लास्टिक पीवीसी, पॉलीयुरेथेन और पॉलीकार्बोनेट समय से पहले जन्मे प्लेंसेटा में मौजूद सबसे आम प्रकार की माइक्रोप्लास्टिक है। वैज्ञानिकों की मानें तो लोगों के ब्रेन में 0.5 पर्सेंट माइक्रोप्लास्टिक जमा हो गई है। ह्यूमन बॉडी में पहुंच रहे इन माइक्रोप्लास्टिक का सेहत पर भी बहुत असर हो रहा है।
ह्यूमन ब्रेन में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा ज्यादा
रिपोर्ट्स की मानें तो 2024 में शोधकर्ताओं ने डेडबॉडी के टेस्ट में ह्यूमन ब्रेन के कई सैंपल लिए थे। इसके बाद उन्होंने इसमें मौजूद माइक्रोप्लास्टिक पर रिसर्च की। इस रिसर्च में उन्होंने पाया कि 8 साल पहले लिए गए सैंपल के मुकाबले में ह्यूमन ब्रेन में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा 50% ज्यादा है। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि जिनकी उम्र 45 या 50 साल की थी उनके ब्रेन टिश्यूज में प्लास्टिक कंसंट्रेशन 4800 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम यानी की 0.5% थी।

इस तरह पड़ेगा सेहत पर प्रभाव
आपको बता दें कि यदि माइक्रोप्लास्टिक ह्यूमन बॉडी के अंगों में जमा हो जाए तो सेल्स डैमेज होने और सूजन का खतरा बढ़ जाएगा। इससे शरीर की बाकी कार्यप्रणाली पर भी असर होगा। इसमें पाए जाने वाले कैमिकल्स कैंसर, प्रजनन संबंधी समस्याएं और विकास संबंधी समस्याओं का कारण बनेंगे। इसके अलावा माइक्रोप्लास्टिक आंत भी भी दिक्कत करेंगे जिसके कारण पाचन और इम्यूनिटी खराब होगी।
