मेनोपॉज हर महिला के जीवन का एक जरुरी हिस्सा है, लेकिन इसके बावजूद कई महिलाएं इसके सेहत पर पड़ने वाले असर को नहीं समझ पाती यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में अक्सर खुलकर बात भी नहीं होती जिसके कारण महिलाएं इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार भी नहीं हो पाती। मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजन का लेवल गिरता है, जिससे शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और सेहत से जुड़े अगल-अलग खतरे बढ़ जाते हैं। डॉक्टर की मानें तो भारत में मेनोपॉज से गुजर रहीं महिलाओं में सबसे आम लक्षणों में गर्मी का अनुभव होना और रात में पसीना आना, नींद में खलल, चिंता, चिड़चिड़ापन, जोड़ों में दर्द और योनि में सूखापन जैसी समस्याएं भी होती हैं। इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी के एक अध्ययन के अनुसार, 75% महिलाएं इन लक्षणों का अनुभव करती हैं।
मेनोपॉज के बाद होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम्स
मेनोपॉज के बाद महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस, दिल की बीमारी और मसल्स का कम होना जैसे सेहत खतरे बढ़ जाते हैं। यह एक ‘मूक बीमारी’ है, जो तब तक पता नहीं चलती जब तक हड्डी में फ्रैक्चर नहीं होता। भारत में 61 मिलियन लोग ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हैं, जिनमें 80% महिलाएं हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए नियमित व्यायाम, कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर डाइट, धूम्रपान से बचाव और शराब का सेवन कम करें।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें
इसके अलावा मसल्स का कम होना या सारकोपेनिया भी एक सामान्य समस्या है, जो महिलाओं में जल्दी होती है। इससे थकान, एनर्जी की कमी और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। ऐसे में इसे रोकने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, बैलेंस्ड डाइट और अच्छी नींद मदद लें।
दिल की बीमारी
एस्ट्रोजन का कम लेवल महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ाता है, जिससे ब्लड प्रेशर और अन्य दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। मनोवैज्ञानिक तनाव भी इस दौरान एक फैक्टर होगा इसके प्रबंधन के लिए मेडिकल कंसल्टेशन, मनोचिकित्सा और सोशल सपोर्ट के उपाय फायदेमंद होंगे। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को नियमित हेल्थ जांच और स्क्रीनिंग करवानी चाहिए, ताकि वे अपने सेहत का ध्यान रख सकें और अगले लाइफ स्टेज का स्वागत हेल्दी तरह से कर पाएं।

