बॉलीवुड और टीवी एक्ट्रेस मंदिरा बेदी को लेकर अभी एक शॉकिंग खबर सामने आई हैं। एक्ट्रेस अस्थमा की मरीज हैं। इस बात का खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में किया। इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि वह अस्थमा से निपटने के लिए इनहेलर का इस्तेमाल करती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पब्लिक प्लेस में इसका इस्तेमाल करना कोई भी शर्मिंदगी की बात नहीं है। इस बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाना बहुत जरुरी है ताकि लोग इस पर खुलकर बात कर पाएं। तो चलिए आज अपने इस आर्टिकल के जरिए आपको इस बीमारी के लक्षण कारण बताते हैं।
लक्षण
आपको बता दें कि अस्थमा एक पुरानी फेफड़ों की बीमारी है, यह सांस लेने वाली नली में होती है। इस जूझ रहे मरीजों की सांस की नली में सूजन और कसाव होने लगता है जिसके कारण उन्हें सांस लेने में काफी ज्यादा तकलीफ होती है। वहीं अगर शुरुआती लक्षण कि बात करें तो
. खांसी
. घरघराहट
. सीने में जकड़न
.सांस लेने में तकलीफ

ये लक्षण हल्के या फिर गंभीर हो सकते हैं और आते-जाते भी रह सकते हैं। धूल या तंबाकू के धुएं या यहां तक कि हंसने जैसे अस्थमा ट्रिगर के संपर्क में आने से भी अस्थमा का दौरा पड़ सकता है।
सर्दी में बढ़ जाती है समस्या
सर्दी में अस्थमा के लक्षण अक्सर ज्यादा गंभीर हो जाते हैं। यह एक पुरानी सांस संबंधी स्थिति है जो सांस की नली में सूजन, सांस फूलने, सीने में दर्द और लगातार खांसी का कारण बन सकती है। ये लक्षण सर्दियों में ज्यादा परेशानियों से भरे हो सकते हैं जो न सिर्फ वयस्कों, बुजुर्गों को बल्कि छोटे बच्चों को भी प्रभावित करेंगे। अस्थमा के लक्षणों को नजरअंदाज करने से स्थिति और भी खराब हो सकती है, इसलिए सही इलाज के लिए खास ध्यान रखने की जरूरत है।
ये आयुर्वेदिक उपाय आएंगे काम
आयुर्वेद अस्थमा के लक्षणों को कम करने के लिए नैचुरल तरीके देता है इसमें सांस की नली को साफ करने और सूजन को कम करने में मदद करने वाले उपाय शामिल हैं। यहां तीन आयुर्वेदिक इलाज बताए गए हैं जो सर्दियों के दौरान अस्थमा के रोगियों को राहत पहुंचाएंगे। तुलसी, या पवित्र तुलसी, बलगम के निर्माण को कम करने, श्वसन पथ को साफ करने और वायुमार्ग की सूजन को कम करने की अपनी शक्तिशाली क्षमता के लिए जानी जाती है। इसके गुण इसे खांसी और जमाव को कम करने के लिए एक प्रभावी उपाय बनाएंगे।

ऐसे इस्तेमाल करें तुलसी
. 5-10 ताजे तुलसी के पत्तों को पानी में उबाल लें।
. जब पानी गर्म हो जाए तो इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं।
. इसे दिन में एक या दो बार पीने से खांसी में आराम मिलेगा और गले से बलगम साफ करने में मदद मिलेगी।
. आप तुलसी के चिकित्सीय गुणों से लाभ उठाने के लिए रोजाना 5-6 ताजे तुलसी के पत्ते चबा सकते हैं या उन्हें सलाद में भी मिला सकते हैं।
मुलेठी
मुलेठी को आयुर्वेद में कफ को नियंत्रित करने के लिए एक बेहद कारगार उपाय के रूप में जाना जाता है। इसके सूजनरोधी गुण वायुमार्ग को शांत करने में मदद करेंगे, जिससे अस्थमा के रोगियों के लिए सांस लेना आसान हो जाएगा। मुलेठी गले पर भी शांत प्रभाव डालेगी और बलगम को साफ करने में मदद करेगी।

ऐसे इस्तेमाल करें मुलेठी
. छाती की जकड़न से राहत पाने और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए मुलेठी के पाउडर को शहद या गर्म पानी में मिलाकर पिएं।
. इसकी चाय बनाने के लिए अपनी नियमित चाय में 1/2 मुलेठी का पाउडर डालें और इसे 5-10 मिनट तक उबलने दें। इस चाय को दिन में एक या दो बार पीने से खांसी और जकड़न से राहत मिलेगी।
