इस मौसम में लगातार मच्छरों के कारण डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही मौसम में बदलाव के चलते लोग बुखार से भी परेशान हो रहे हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जून तक डेंगू के 32 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं और इससे 32 लोगों की मृत्यु भी हो चुकी हैं। जून के बाद बरसात के मौसम में तो ये आंकड़ा काफी बढ़ गया हैं। दरअसल, मौसम में बदलाव के साथ वायरल बुखार और मच्छरों से जुड़ी बीमारियां एक साथ शुरू हो जाती हैं। इससे समस्या ये हो जाती है कि लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि उन्हें कौन सी बीमारी हुई है। कई बार लोग खुद ही दवाइयां ले लेते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। एक साथ डेंगू और टाइफाइड होने पर मरीजों को क्या करना चाहिए, आइए इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं।
कितना आम है डेंगू और टाइफाइड का एक साथ होना?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये दोनों बीमारियां एक साथ हो सकती है, हाल ही के दिनों में डेंगू और टाइफाइड के मामले एक साथ देखने को मिले हैं। दरअसल, दोनों ही बीमारियां खासतौर पर मानसून में फैलती है और इसी वजह से इन दोनों का एक साथ होना संभव है, लेकिन इस बीमारी का प्रतिशत काफी कम है। लोगों को थोड़ी सतर्कता रखनी चाहिए ताकि ये दोनों बीमारियां एक साथ होकर गंभीर न हो।

डेंगू और टाइफाइड होने का मुख्य कारण
भारत में आमतौर पर लोग बुखार, सिरदर्द या किसी भी अन्य तरह के दर्द के लिए दवाइयां खुद ही ले लेते हैं। लोग डॉक्टर से सलाह लिए बिना केमिस्ट के कहने पर दवाइयां लेकर अपनी बीमारी को ठीक करने की कोशिश करते हैं। इस बारे में NCBI की रिसर्च में यह पता चला है कि भारत में लगभग 60 फीसदी लोग किसी भी बीमारी के इलाज में खुद ही दवाई लेना पसंद करते हैं। इस बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार बीमारी की पहचान किए बिना लोग खुद ही दवाई लेकर स्थिति को गंभीर कर देते हैं। अगर कोई बुखार को सामान्य वायरल फीवर समझकर बिना डॉक्टर से सलाह लिए दवाई ले लेता है, तो इससे डेंगू या टाइफाइड के लक्षण छिप सकते हैं। इससे इलाज में देरी हो सकती है और दोनों बीमारियों की गंभीरता को बढ़ा सकती है।
एक साथ दोनों बीमारियां होना कितना गंभीर है
जब डेंगू और टाइफाइड एक साथ हो जाता है, तो ये स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। डेंगू होने पर ये ब्लड प्लेटलेट्स पर असर डालता है। अगर ब्लड प्लेटलेट्स कम हो जाए, तो इंटरनल ब्लीडिंग होने के चांस भी बढ़ जाते हैं। टाइफाइड पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी और पेट में दर्द होती है। अगर दोनों एक साथ हो जाए तो शरीर के कई अंगों के काम प्रभावित हो सकते हैं इसमें लिवर, किडनी के साथ-साथ दिल को भी नुकसान होता है। यदि समय पर दोनों बीमारियों का इलाज न हो, तो ये जानलेवा भी हो सकता है इसलिए, समय रहते डॉक्टर से सलाह लें और टेस्ट करवाकर दवाइयां लें ताकि बीमारी गंभीर न हो।

डेंगू-टाइफाइड से ऐसे करें बचाव
टाइफाइड और डेंगू से बचाव के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।
. अपने आस-पास पानी न होने दें।
. मच्छरों से दूर रहने के लिए रिपेलेंट जरूर लगाएं।

. बाहर निकलने पर पूरी बाजू के कपड़े पहनें और पैरों को ढककर रखें।
. टाइफाइड से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें।
. साफ पानी पिएं।
. खाने को अच्छे से पकाकर खाएं।
इसके अलावा कुछ मामलों में टाइफाइड को रोकने के लिए वैक्सीन भी दी जा सकती है। मौसमी बीमारियों से बचने के लिए साफ-सफाई के अलावा खान-पान पर भी ध्यान दें। संतुलित मात्रा में आहार लें और पानी पिएं मौसमी फल-सब्जियां ज्यादा से ज्यादा खाएं और नियमित कसरत जरूर करें।
