मौसम बदल रहा है ऐसे में बदलते हुए मौसम लोगों को बीमार होने से डर नहीं लगता है, लेकिन डॉक्टर की सुई देखते ही कुछ लोग परेशान हो जाते हैं। आपने भी ऐसे कई लोग देखे होंगे जो सुई देखकर ही चिंता में पड़ जाते हैं। सुई लगाते समय कुछ सेकेंड के लिए मन में डर आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन अगर आप सुई देखते ही दूर भागने लगेंगे, इसकी वजह से मानसिक आप मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं, सुई देखते ही आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हार्ट बीट तेज हो जाती है, तो यह बिल्कुल भी एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है। लोगों को सुई देखते ही डर क्यों लगता है और इस डर से बाहर आने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए, आज आर्टिकल के जरिए आपको बताएंगे। आइए जानते हैं।
सुई देखते ही इसलिए लगता है डर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सुई देखते ही दो पल के लिए डरना एक आम प्रक्रिया है और हर उम्र के व्यक्ति को इससे दो-चार होना पड़ता है लेकिन जिन लोगों को सुई देखते ही पसीने आना और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, तो यह एक मानसिक स्थिति है। इस मानसिक स्थिति को ट्रिपैनोफोबिया कहते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि ट्रिपैनोफोबिया सिर्फ डॉक्टर के इंजेक्शन वाली सुई को देखकर ही ट्रिगर करता है।

किसे हो सकता है ट्रिपैनोफोबिया?
यह आमतौर पर बचपन से ही लोगों को प्रभावित करता है। जब शिशु को बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन लगाई जाती है, तो सुई का डर उनके दिमाग में घर कर जाता है और इस डर को समय के साथ न निकाला जाए, तो यह दिमाग में घर बना लेता है। नीचे बताई गई स्थितियों में ट्रिपैनोफोबिया ज्यादा देखने को मिलता है।
. सुइयों के साथ नेगेटिव या फिर कोई दर्दनाक अनुभव।
. परिवार में किसी को सुई फोबिया होना ।
. बीमारी या दवा से संबंधित कोई डर, जैसे हाइपोकॉन्ड्रिया या जर्मन फोबिया (माइसोफोबिया)।
ट्रिपैनोफोबिया के लक्षण
. रोंगटे खड़े होना
. मानसिक डर होना
. त्वचा को खरोंचना
. उल्टी और चक्कर आना
. पैनिक अटैक

. पसीना आना
. शरीर का कांपना
. चक्कर आना
अगर आपको इंजेक्शन वाली सुई देखते ही अपने अंदर इनमें से कोई लक्षण नजर आता है, तो इस विषय पर डॉक्टर से बात जरुर करें।
इलाज
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रिपैनोफोबिया एक मानसिक स्थिति है। इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है। मन के इस डर को थेरेपी और बातचीत के जरिए ठीक किया जा सकता है, जिन लोगों के परिवार में ट्रिपैनोफोबिया की कोई हिस्ट्री रही है, उन्हें अपने बच्चों को शुरुआत से ही सुई के प्रति डर की भावना हटाने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।

