घर से दूर रहने वाले कई लोग रेडी तो ईट खाना ही खाते है। इसकी वजह ये है कि उनका लाइफस्टाइल इतना ज्यादा बिजी है कि उन्हें फ्रेश खाना बनाने का समय ही नहीं हैं। ऐसे में वे अपनी फिजिकल हेल्थ के साथ साथ मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित का रहे हैं। इसी वजह से आजकल लोगों में एंग्जाइटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ रहा है।
दरअसल हाल ही icmr ने खाने की कई चीजों को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। जिसमे कहा गया था कि रेडी तो ईट खाना सेहत को नेगेटिव इफ़ेक्ट देता है।
डिप्रेशन का एक मुख्य कारण अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन
बता दें हमेशा रेडी टू ईट खाना खाना मेंटल हेल्थ को काफी प्रभावित करता है। इसका असर सीधे दिमाग पर पड़ता है। कहने का मतलब ये की जो खाते हैं वह सीधे मस्तिष्क की संरचना, कार्य और मूड को प्रभावित करता है। डीकिन यूनिवर्सिटी और कैंसर काउंसिल विक्टोरिया में एक शोध किया गया जसमे पाया गया कि प्रोसेस्ड फूड एंग्जाइटी और डिप्रेशन का एक मुख्य कारण है। अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड को केमिकल के साथ और अधिक प्रोसेस किया जाता है, जिसकी वजह से ये हमारे दिमाग पर गलत प्रभाव डालता है।
प्रोसेस्ड फूड का सेवन किस तरह से करता है मेंटल हेल्थ को प्रभावित
बता दें प्रोसेस्ड फूड हमारी ओवरऑल हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है। प्रोसेस्ड फूड्स में शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट की ज्यादा शरीर को ख़राब करती है। इसके अलावा इससे ब्लड शुगर के स्पाइक्स और क्रैश होने का खतरा ही रहता है। इसके चलते चिड़चिड़ापन हो सकता है। इसके अतिरिक्त बहुत अधिक चीनी का सेवन अवसाद को बढ़ावा दे सकता है।
वहीँ प्रोसेस्ड फूड खाने से मेमोरी वीक होने के साथ दिमाग कमजोर धीरे धीरे होने लग जाता है। जो डिप्रेशन और डिमेंशिया का कारण बनता है।
बता दें सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है। यह नींद और भूख को कण्ट्रोल कर मूड को ठीक करने और दर्द को कम करने में मदद करने का काम करता है। जो लोग प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, उनके दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर असंतुलित होने लगता है जिस वजह से व्यक्ति को मेंटल हेल्थ इश्यूज होने शुरू हो जाते हैं।
घर का बना खाना बेस्ट आप्शन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक लाइफस्टाइल कैसा भी हो, कितना ही बिजी क्यों न हो। ऐसे में घर का बना ताजा खाना सेहत को लाभ देता है। वहीँ जल्दबाजी में प्रोसेस्ड फूड खाने से, उसका असर बाद में देखने को मिलता है। इसलिए बेहतर यही है कि पारंपरिक घर का बना भोजन ही खाना चाहिए, क्योंकि फिर आप एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक बिमारियों के होने से बच सकते हैं।
