अक्सर हेल्थ से जुड़े एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कैंसर की बीमारी का जितना जल्दी पता चल जाए उतना ही सफलता का दर बढ़ जाता है हालांकि कैंसर को लेकर लोगों में काफी जागरुकता आई है, इसके बावजूद महिलाओं से जुड़े कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज किया जाता है। इसका मुख्य कारण महिलाओं का लक्षणों को दूसरी बीमारियों से जोड़कर देखना है। इस वजह से कई बार कैंसर का एडवांस स्टेज पर पहुंचकर पता चलता है। भारत की बात करें तो महिलाएं शरीर में हो रहे किसी भी तरह के बदलाव को तब तक इग्नोर करती हैं, जब तक बीमारी गंभीर रूप में न बदल जाए। अगर हम NFHS 5 की रिपोर्ट को देखें तो पता चलता है कि ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए सिर्फ 0.9 प्रतिशत महिलाएं ही गई है। सर्विकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए 1.9 फीसदी महिलाओं ने स्क्रीनिंग करवाई है जबकि ब्रेस्ट और सर्विकल कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा पाए जाते हैं।

महिलाओं में कुछ ऐसे हैं कैंसर के आंकड़े

WHO की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में कैंसर मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है। साल 2020 में 1 करोड़ लोगों की मौत इसी वजह से हुई थी इसमें अगर ब्रेस्ट कैंसर की बात करें तो WHO के अनुसार, साल 2022 में इस कैंसर की वजह से दुनियाभर में 670 000 मौत हुई थी। कैंसर के मामले में भारत भी कहीं पीछे नहीं है। NCBI के अनुसार साल 2022 में कैंसर के कुल 1461427 मामले सामने आए थे जिसमें महिलाओं में कैंसर के 749251 मामले थे। इससे पता चलता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कैंसर के मामले ज्यादा बढ़ रहे हैं।

लैंसेट में प्रकाशित ‘वूमेन, पावर और कैंसर’ (women, power and cancer) स्टडी के अनुसार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कैंसर की प्राथमिक रोकथाम की संख्या कम थी। इस स्टडी में ये भी बताया गया कि जिन देशों का एचडीआई (HDI) में निचला स्थान है वहां महिलाओं में कैंसर से होने वाली 72% मृत्यु समय से पहले हुई थी जबकि जिन देशों का एचडीआई ऊपर हैं वहां आंकड़ा 36 फीसदी था। इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि भौगोलिक या आर्थिक संसाधनों के परे कई देशों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कैंसर से जुड़ी देखभाल के फैसले लेने की शक्ति कम होती है।

कारण

कैंसर के बढ़ते कारण की अगर बात करें तो ये काफी जटिल मुद्दा है, जिसके पीछे कई कारण काम करते हैं। अस्वस्थ खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी में कमी, तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन जैसे कारक कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। इसके अलावा वायु और पानी का प्रदूषण, रसायनों के संपर्क में आना, परिवार में कैंसर की हिस्ट्री होना, हार्मोन में बदलाव होना, महिलाओं का ज्यादा से ज्यादा स्क्रीनिंग कराना महत्वपूर्ण कारक है। साथ ही जो महिलाएं देर से गर्भ धारण करती हैं, उन्हें स्तन कैंसर का खतरा थोड़ा ज्यादा होता है।” महिलाओं को कैंसर के लक्षणों, उसकी पहचान और रोकथाम पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देना चाहिए। यदि किसी को कैंसर के बारे में कोई परेशानी लगती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

चेतावनी संकेत

महिलाओं को खासतौर पर कुछ ऐसे लक्षणों पर गौर करते रहना चाहिए।

. महिलाओं को अपने ब्रेस्ट में कुछ बदलाव लगे, या फिर कोई गांठ जैसा महसूस हो।

. निप्पल्स में डिस्चार्ज निकलें या दर्द हो।

. पेटदर्द या सूजन ।

. असामान्य रक्तस्त्राव या वजाइना के आसपास खुजली, जलन जैसा महसूस हो।

. लगातार वजन बढ़ना या घटना और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना

. दस्त या कब्ज की समस्या लगातार बनी रहें।

. त्वचा में बदलाव लगे।

महिलाएं खुद को ऐसे रखें हेल्दी

महिलाओं को फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, दूध उत्पादों और कम वसा वाले प्रोटीन से भरपूर आहार लेना चाहिए। रोजाना कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज करें। रात में कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें। योग और ध्यान करें। साथ ही धूम्रपान और शराब का सेवन करने से बचें।

. प्रजनन से जुड़ी जांच के लिए स्त्रीरोग विशेषज्ञ से मिलें।

. सुरक्षित यौन संबंध बनाएं।

. यौन संक्रमित रोगों के लिए नियमित जांच करवाएं।

. मेनोपॉज के दौरान होने वाले शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तनों के प्रति जागरुक रहें।

इसके साथ ही सर्वाइकल कैंसर का वैक्सीन हर महिला को लगवाना चाहिए यह वैक्सीन कैंसर के मुख्य कारणों जैसे कि मानव पैपिलोमावायरस (HPV) के खिलाफ सुरक्षा देता है। ये आमतौर पर दो या तीन खुराकों में दिया जाता है। महिलाएं हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाकर कई बीमारियों से बच सकती हैं। अगर कोई समस्या महसूस हो तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

By tnm

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