नींद हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है और यह हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। कई लोग रात को पर्याप्त नींद लेने के बावजूद दिन में सोने की जरूरत महसूस करते हैं। आपने कभी मेट्रो, बस या किसी और सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करते समय लोगों को खड़े-खड़े नींद में लुढ़कते देखा होगा। कुछ लोग तो ड्राइविंग करते वक्त भी नींद महसूस करते हैं। यह सभी स्थितियां खराब स्लीप पैटर्न की ओर इशारा करती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एम्स (AIIMS), नई दिल्ली के प्रोफेसर डॉक्टर विजय हड्डा, जो पल्मनरी और स्लीप मेडिसिन केयर विभाग के सीनियर हैं, ने एनबीटी से बातचीत में बताया कि रात को सही समय पर सोना बहुत जरूरी है ताकि शरीर का संतुलन बना रहे और आप बीमारियों से बच सकें। अच्छी नींद न सिर्फ ताजगी प्रदान करती है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों से बचाव में भी मददगार है। उन्होंने यह भी बताया कि गाड़ी या बाइक चलाते समय या यात्रा करते वक्त नींद आना यह संकेत है कि आप रात को पर्याप्त नींद नहीं ले रहे हैं। यह समस्या तब होती है जब लोग 5-6 घंटे ही सोते हैं, जो एक खराब स्लीप पैटर्न का संकेत है।
स्लीप पैटर्न क्यों है जरूरी?
स्लीप पैटर्न का मतलब है नींद लेने का सही तरीका, जिसमें समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना शामिल है। एक अच्छा स्लीप पैटर्न शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। स्लीप पैटर्न पर किए गए अध्ययनों से यह सामने आया है कि एक खराब स्लीप पैटर्न से कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कई बड़े मेडिकल संस्थान इस बारे में टेस्ट भी करते हैं, जिसमें व्यक्ति को रात 8 बजे सुलाया जाता है और सुबह 6 बजे उठाया जाता है। इस टेस्ट से यह पता चलता है कि सही स्लीप पैटर्न अपनाने से व्यक्ति ज्यादा ताजगी महसूस करता है।
रिजल्ट्स: क्या कहते हैं अध्ययन?
स्लीप पैटर्न पर किए गए अध्ययनों में यह पाया गया है कि जब व्यक्ति रात 8 बजे या उसके थोड़े बाद सोता है और सुबह 6 बजे उठता है, तो वह ताजगी और ऊर्जा महसूस करता है। इसके अलावा, उन्हें तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं नहीं होतीं। इस प्रकार, एक सही और नियमित स्लीप पैटर्न अपनाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
अच्छी नींद के लिए कुछ सुझाव
फोन और लैपटॉप से दूरी बनाएं: सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल न करें।
जल्दी सोने की आदत बनाएं: हर दिन एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
कैफीन से बचें: शाम 6 बजे के बाद चाय या कॉफी का सेवन न करें।
स्लीप पैटर्न का पालन करें: हर दिन समान समय पर सोने की आदत डालें।
तकिया ऊंचा न रखें: नींद में किसी तरह की असुविधा से बचने के लिए तकिए को बहुत ऊंचा न रखें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
