पीसीओएस और पीसीओडी एक ऐसी समस्या है जिससे आजकल की महिलाएं सबसे ज्यादा जूझ रही हैं। इस समस्या के कारण हार्मोन्स इंबैलेंस हो जाते हैं ऐसे में इन्हें नियंत्रित करने के लिए बैलेंस्ड डाइट लेना बेहद जरुरी होता है। हार्मोन्ल इशुज के चलते कई हार्मोन्स एक साथ इंबैलेंस होने लगते हैं जिसके कारण पूरी बॉडी में न्यूट्रिएंट्स की कमी भी होने लगती है। ऐसे में एक्सपर्टस की मानें तो इस समस्या से बचने के लिए विटामिन-सी के लेवल का खास ध्यान रखना चाहिए। यदि इन हार्मोनल इश्युज के चलते शरीर में विटामिन-सी की कमी हो जाए तो समस्या बढ़ सकती है। तो चलिए आपको बताते हैं कि हार्मोन्स को बैलेंस रखने के लिए विटामिन-सी क्यों जरुरी है।

हार्मोन्स रहेंगे बैलेंस

विटामिन-सी आपके शरीर में हार्मोन्स को बैलेंस रखने में मदद करेगा। यह आपके शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का प्रोडक्शन बढ़ाएगा। पीसीओएस और पीसीओडी में यह दोनों हार्मोन्स बैलेंस में रहने चाहिए। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बैलेंस रहने से आपको पीरियड्स रैगुलर आएंगे। यह आपकी ओव्युलेशन को सुधारने और फर्टिलिटी बढ़ाने में भी मदद करेगा।

इम्यूनिटी बनाएगा मजबूत

पीसीओएस और पीसीओडी के कारण शरीर में इंफ्लेमेशन हो जाती है। ऐसे में इसके कारण इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो सकता है इससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ेगा इसलिए आप डाइट में विटामिन-सी शामिल कर सकते हैं। यह आपके शरीर में व्हाइट सेल्स प्रोड्यूस करेगा जिससे आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत होगी। इसके अलावा यह स्किन हेल्थ इंप्रूव करेगा जिससे स्किन संंबंधी बीमारियों का खतरा कम होगा।

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस होगा दूर

विटामिन-सी एक बहुत अच्छा एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है ऐसे में यह हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद करेगा। पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोन्स इंबैलेंस हो जाते हैं जिसके कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस हो सकता है ऐसे में आप विटामिन-सी को अपनी डाइट में शामिल करें। यह फ्री रेडिकल्स से लड़ेगा इंफ्लेमेशन कम करेगा और सेल्युलर हेल्थ को सही रखने में भी मदद करेगा।

इंसुलिन सेंसिटिविटी रहेगी सही

पीसीओएस और पीसीओडी में महिलाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या भी काफी होती है। इस दौरान ब्लड ग्लूकोज और इंसुलिन लेवल हाई हो जाता है जिससे समस्या बढ़ सकती है लेकिन यदि आपके शरीर में विटामिन-सी बैलेंस होगा तो इससे इंसुलिन कंट्रोल में रहेगा। पीसीओएस और पीसीओडी में विटामिन-सी लेने से इंसुलिन सेंसिटिविटी इंप्रूव होगी। इसके अलावा ग्लूकोज मेटाबॉल्जिम बूस्ट होगा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम होगा।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

By tnm

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