इंसान का बातचीत करना एक आम आदत है। चाहे थोड़ी करे या ज्यादा। इंसान ही नहीं बाकी जीव-जन्तु तक आपस में बातें करते हैं। ये सभी की एक बेसिक नीड है। बिना बातचीत के हम अपनी बात किसी को समझा नहीं सकते या कह नहीं सकते और सामने वाले की बात भी नहीं समझ सकते। लेकिन अगर कोई बातचीत नहीं करता, एकदम अपने आप को अलग रखता है तो इसके अभाव में मेंटल हेल्थ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मनोचिकित्सा के अनुसार अगर एक ही व्यक्ति के साथ बार बार ये हो रहा हो तो ये एक संभावित सामाजिक संज्ञान परिवर्तन का संकेत हो सकता है। हाल ही में हुए एक शोध में पता चला है कि सामाजिक संज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के बीच रिश्ता है। सामाजिक संज्ञान (Social Cognition) एक तरह की क्षमता है जिसके जरिए हम दूसरों की भावनाओं को समझते हैं और उनके इरादों, विश्वासों का आंकलन करते हैं।
Mental Problems हो सकती हैं इसका कारण
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मानसिक समस्याओं के कारण दूसरों की भावनाओं को समझने और खुलकर बात करने की शक्ति में कमी आ सकती है। ये कमी कई मानसिक स्वास्थ्य विकारों जैसे डिप्रेशन, बायपोलर डिसऑर्डर और स्किज़ोफ्रेनिया में देखी जाती है।
जीवन पर इसका प्रभाव
जानकारी के अनुसार पता चला है कि बायपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों में सामाजिक संज्ञान में कमी उनके रोजाना के कार्यों को करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इस वजह से व्यक्ति अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाता, दूसरों के साथ संबंध नहीं बना पाता और सामाजिक जीवन में भागीदारी करने में भी बाधाएं आती हैं।
बचाव के उपाय
इसे सुधारने के लिए कई तरह के उपाय किए जा सकते हैं। जैसे कि जो लोग इससे पीड़ित हैं उन्हें व्यायाम कराया जा सकता है ताकि दूसरों की भावनाएं समझें। साथ ही कहानियों के जरिए भी आप ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि इसकी मदद से पात्रों के इरादे धीरे-धीरे प्रकट होते हैं।
अगर आपके परिवार और दोस्तों में या आस-पास इसस कोई गुजर रहा है तो ये जरूर समझें कि वे जानबूझकर चोट नहीं पहुंचा रहे होते। उनका इरादा आपको ठेस पहुंचाने का नहीं होता।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
