जब शरीर नॉर्मल टेंप्रेचर से बढ़ जाए और छूने पर गर्म महसूस हो तो इस स्थिति को बुखार कहते हैं। बुखार आना इम्यूनिटी सिस्टम के रिएक्शन के कारण हो सकता है। बदलते मौसम में बुखार आना आम है जिसे कई बार लोग हल्का समझकर भी इग्नोर कर देते हैं। हालांकि यदि यह बुखार बिगड़ जाए तो टाइफाइड का कारण भी बन सकता है। शरीर का तापमान कई कारणों से बदलता है। मौसम में बदलाव, इंफेक्शन होने पर, वैक्सीन लगावाने के बाद जैसी कंडीशन में बॉडी टेंपरेचर बढ़ सकता है। जब यही तापमान ज्यादा होता है तो इसे बुखार (Fever) कहते हैं। बुखार होने पर कई तरह की परेशानियां होती हैं, कई बार अचानक से शरीर का तापमान बढ़ जाता है ऐसे में क्या चिंता करने की सच में जरूरत है या फिर यह नॉर्मल ही है। आइए इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं।
इंफेक्शन के कारण होता है
बुखार यानी फीवर बॉडी टेंप्रेचर में कुछ समय के लिए बदलाव होने की प्रक्रिया है जब शरीर नॉर्मल टेंपरेचर से बढ़ जाए और छूने पर गर्म महसूस हो तो ऐसी स्थिति को बुखार कहते हैं। बुखार आना इम्यूनिटी सिस्टम के रिएक्शन के कारण भी हो सकता है आमतौर पर यह किसी इंफेक्शन की वजह से होता है।

इतना बॉडी टेंप्रेचर है नॉर्मल
हमारे देश में एक स्वस्थ शरीर का तापमान 98.4 डिग्री फारेनहाइट आंका गया है, जबकि अमेरिका जैसे देशों में यह 98.6 डिग्री फारेनहाइट है हालांकि यह टेंप्रेचर हर किसी में अलग-अलग हो सकता है। यदि बॉडी का टेंपरेचर 96-99 फारेनहाइट तक है, तो वह नॉर्मल माना जाता है। दिन के समय भी शरीर के तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होती है।
इस समय आता है बुखार
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, जब शरीर का तापमान 100.4 डिग्री फारेनहाइट या उससे ज्यादा हो तो बुखार होता है।

बच्चे का अगर 103 डिग्री से ज्यादा टेंप्रेचर तो न बरतें लापरवाही
अगर किसी बच्चे की बॉडी का टेंप्रेचर 103 डिग्री से ज्यादा है और दवा से कम नहीं हो रहा तो लापरवाही न बरतें। तुरंत डॉक्टर के पास बच्चे को लेकर जाएं। बच्चा 3 महीने से कम उम्र का है तो 100 डिग्री से ज्यादा टेंप्रेचर में डॉक्टर को दिखांए यदि बच्चे का बुखार किसी टीका लगने के 48 घंटे बाद भी कम नहीं हो रहा है तो डॉक्टर के पास जाने में देरी न करें। यदि बच्चा खाना पीना नहीं कर रहा है और उसे पेशाब भी नहीं हो रही है तो भी डॉक्टर के पास जाएं।
