भगवान श्रीराम को भारत में ही नहीं बल्कि और भी जगहों में पूजा जाता है, लेकिन भारत में उन्हें सबसे ज्यादा माना जाता है। भगवान राम की जिंदगी की हर एक चीज हमें बहुत कुछ सीखाती है। आज भारत का लोकप्रिय त्योहार दशहरा है। इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावण पर जीत हासिल की थी, जिसके रूप में दशहरा मनाया जाता है।

भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम ऐसे ही नहीं कहते। उनके चरित्र की बहुत सी विशेषताएं हैं जो उन्हें सबसे अलग बनाती हैं। इसलिए आज दशहरा के पावन अवसर पर हम आपको भगवान श्रीराम के जीवन के कुछ सिद्धांत बताएंगे।

सहनशीलता और धैर्य

अगर आप चाहते हैं कि आपके अंदर भी सहनशीलता और धैर्य जैसे गुण आएं तो भगवान राम से अच्छा गुरु कोई नहीं हो सकता। उन्होंने मां कैकेयी की आज्ञा मानकर 14 साल वनवास में बिताएं, ये ही सहनशीलता और धैर्य के बहुत बड़े गुण हैं।

वचन के पक्के

प्राण जाए पर वचन ना जाए, इस कहावत का उदाहरण भगवान श्रीराम ने बखूबी पूरा किया। अपने पिता राजा दशरथ का वचन निभाने के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया, राज पाठ की चिंता किए बिना वे चले गए। आजकल के लोगों को समझना चाहिए कि वचन कितना जरूरी है।

माता-पिता का आदर

अपने माता-पिता की बात सुनकर और उनका आदर कर वे वनवास के लिए चले गए, लेकिन अगर आजकल की बात होती तो शायद कोई न करता। जब उनका भाई भरत उन्हें मनाने जंगल गया तो भी वे नहीं आए, क्योंकि उन्होंने अपने पुत्र धर्म का पालन करना था।

नेतृत्व (Leadership Quality) की क्षमता

वनवास में भी रहते हुए प्रभु राम ने कुशल प्रबंधन के चलते रावण जैसे बड़े और ज्ञानी राजा को पराजित किया। रास्ते में समुंद्र आने पर भी हार नहीं मानी, पत्थरों का सेतु बनाकर सुग्रीव की वानर सेना की मदद से रावण का सामना किया। इससे पता चलता है कि नेतृत्व करने की क्षमता हो तो बड़ी लड़ाई भी जीती जा सकती है।

By tnm

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