रवांडा में इबोला जैसे और खतनाक संक्रमण मारबर्ग वायरस के कारण अभी तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। यह बात देश में घातक रक्तस्नावी बुखार के प्रकोप की घोषणा के कुछ दिनों बाद कही गई है जिसके लिए कोई अधिकृति टीका या फिर उपचार भी नहीं है। इबोला की तरह मारबर्ग वायरस भी फल खाने वाले चमगादड़ों से पैदा होता है और संक्रमित व्यक्तियों के शारीरिक तरल पदार्थ या दूषित बिस्तर की सतहों के संपर्क के माध्यम से लोगों के बीच में फैलता है। उपचार के बिना मारबर्ग बीमारी से पीड़ित 88% लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।

रवांडा में वायरस के कारण 6 मौतें

मध्य अफ्रीका के एक स्थल रुद्ध देश रवांडा में शुक्रवार को वायरस के प्रकोप के बाद एक दिन बाद पहली छ मौतें रिपोर्ट की गई हैं। रवांडा का कहना है कि इबोला जैसे और अत्यधिक संक्रामक मारबर्ग वायरस से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। देश के द्वारा खतरनाक रक्तस्नावी बुखार के प्रकोप की घोषणा के कुछ दिनों बाद जिसका कोई वैक्सीनेशन या दवा भी नहीं है। इबोला की तरह मारबर्ग वायरस फल चमगादड़ों से पैदा होता है और संक्रमित व्यक्तियों के शारीरिक तरल पदार्थ या गंदे बिस्तर की सतहों के जरिए लोगों में फैलत है। यदि इसके इलाज के बिना व्यक्ति बीमार हो जाए तो यह 88% लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। मध्य अफ्रीका के रवांडा राज्य ने शुक्रवार को प्रकोप की घोषणा की और एक दिन बाद ही इस वायरस के कारण 6 मौतें रिपोर्ट की गई। अब तक 26 मामलों की पुष्टि भी हो चुकी है और बीमार लोगों में से आठ की मौत हो गई है। प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए लोगों से शारीरिक संपर्क से बचने के लिए कहा गया है। वायरस से संक्रमित पाए गए लोगों के संपर्क में आए लगभग 300 लोगों की भी पहचान कर ली गई है तथा उनमें से अज्ञात संख्या में लोगों को पृथक केंद्रों में रखा गया है।

आइसोलेशन में रखे गए लोग

लोगों से यह अपील भी की गई है कि वे संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए शारीरिक संपर्क से बचें। वायरस से संक्रमित लोगों के संपर्क में 300 लोगों की भी पहचान की गई ह और उनमें से कुछ को आइसोलेशन की सुविधाओं में रखा गया है। देश के 30 में से 6 जिलों में जो लोग वायरस से संक्रमित हुए हैं वह हेल्थकेयर वर्कर हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मारबर्ग एक दुर्लभ बीमारी है। इस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए संपर्क ट्रेसिंग और परीक्षण तेज कर रहे हैं। बीमारी का स्त्रोत अभी तक नहीं पता चला है। उन्होंने कहा कि वायरस से संक्रमित व्यक्ति में लक्षण दिखने के लिए तीन दिन से लेकर तीन हफ्ते तक का समय लग सकता है।

लक्षण

वहीं यदि वायरस के लक्षणों की बात करें तो

. बुखार

. मांसपेशियों में दर्द

. उल्टी

. दस्त

. कुछ मामलों में ज्यादा खून की कमी के कारण व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अपना समर्थन बढ़ा रहा है और प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए रवांडा के अधिकारियों के साथ काम करेंगे। इसके अलावा रवांडा में अब तक एमपॉक्स के छ मामले सामने आए हैं जो चेचक से संबंधित वायरस के कारण होने वाली बीमारी है लेकिन आमतौर पर इसके लक्षण हल्के होते हैं। एमपॉक्स जिसे पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था क्योंकि यह पहली बार शोध बंदरों में देखा गया था कई अन्य अफ्रीकी देशों को भी प्रभावित किया है जिसे डब्ल्यूएचओ ने विश्व एमरजेंसी घोषित किया है। रवांडा ने इस महीने की शुरुआत में एमपॉक्स टीकाकरण अभियान शुरु किया और देश में ज्यादा टीके आने की उम्मीद है। पड़ोसी कांगो में अब तक एमपॉक्स के ज्यादातर मामले सामने आए हैं जो इमरजेंसी का केंद्र है।

By tnm

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