कैंसर एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। इस स्थिति का सही समय पर पता लगाकर उसका इलाज शुरु किया जा सकता है। कैंसर के इलाज में मुख्य रूप से कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इलाज की यह प्रक्रिया शरीर के कुछ हिस्सों पर दुष्प्रभाव दिखा सकती है, इसमें म्यूकोसाइटिस को भी शामिल किया जाता है। म्यूकोसाइटिस में व्यक्ति के मुंह और आंतों के मार्ग को कवर करने वाली म्यूकस मेम्ब्रेन में सूजन आ जाती है। दरअसल, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के प्रभाव के कारण होता है। हालांकि यह स्थिति कुछ समय बाद ठीक हो जाती है, लेकिन इसमें व्यक्ति को बहुत दर्द का सामना करना पड़ता है। म्यूकोसाइटिस के कारण व्यक्ति को मुंह, गला और कई बार आंतों में छाले बनने की समस्या होती है। साथ ही, कुछ लोगों को पानी पीने और बात करने तक में परेशानी होती है। टीवी एक्ट्रेस हिना खान को भी यह समस्या हुई थी हालांकि अब वह ठीक हैं इस बात की जानकारी उन्होंने खुद फैंस को सोशल मीडिया के जरिए दी है।

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म्यूकोसाइटिस के प्रकार

म्यूकोसाइटिस शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करता है।

ओरल म्यूकोसाइटिस

इसमें मुंह के अंदर की म्यूकस मेम्ब्रेन सूज जाती है। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के कारण यह समस्या होती है, खासकर जब कैंसर का इलाज सिर और गर्दन के क्षेत्र में किया जा रहा हो। इस दौरान व्यक्ति के मुंह में छाले, लालिमा, सूजन, दर्द होता है। इसमें व्यक्ति को खाने-पीने में भी परेशानी होती है।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल म्यूकोसाइटिस

इसमें आंतों की म्यूकस मेम्ब्रेन में सूजन होती है। यह स्थिति पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, जिसमें पेट, छोटी आंत और बड़ी आंत शामिल हैं। इसमें पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। इसमें व्यक्ति को दस्त, उल्टी, पेट दर्द, और भूख न लगना आदि जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं।

लक्षण

. मुंह के अंदर सफेद या पीले रंग के छाले होना, जो बेहद दर्दनाक हो सकते हैं।

. प्रभावित क्षेत्र में सूजन और लालिमा होना।

. छाले के कारण बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।

. इसके कारण भोजन निगलने में कठिनाई हो सकती है।

. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल म्यूकोसाइटिस में दस्त और पेट में ऐंठन होती है।

क्या इलाज के बाद हो सकता है म्यूकोसाइटिस

इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन इसके उपचार के बाद इसके दोबारा होने की संभावना बनी रहती है। खासकर उन लोगों में जो कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से गुजर रहे होते हैं। अगर कैंसर का इलाज लंबे समय तक चलता है तो म्यूकोसाइटिस दोबारा से हो सकते हैं, क्योंकि म्यूकस मेम्ब्रेन की कोशिकाएं बार-बार डैमेज होती हैं। यदि म्यूकोसाइटिस इंफेक्शन या किसी अन्य बीमारी के कारण होता है, तो इसके दोबारा होने की संभावना कम होती है।

म्यूकोसाइटिस एक ऐसी गंभीर स्थिति होती है, लेकिन सही इलाज और सावधानियों से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। कैंसर के उपचार के दौरान व्यक्ति को कई तरह की सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। म्यूकोसाइटिस या अन्य समस्या होने पर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

By tnm

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