आज कल के लाइफस्टाइल में हर कोई तनाव से ग्रस्त है। जिसका असर हमारी मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। वहीँ इसी की वजह से हमारा ब्रेन भी कई तरह की बिमारियों की जकड में आ जाता है। ऐसे में दुनिया भर में इसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 22 जुलाई को World Brain Day मनाया जाता है। वहीँ हर साल ये एक थीम पर आधारित होता है, इस साल की थीम मस्तिष्क स्वास्थ्य और रोकथाम रखी गयी है। इसी के बारे में और भी अधिक जानकारी के लिए हमने जालन्धर के न्यूरो सर्जन डॉ. संदीप कुंडल से जानकारी ली।
डॉ. संदीप ने बताया कि ये ब्रेन से जुड़ी एक खतरनाक, लेकिन हल्के में ली जाने वाले बीमारी- स्ट्रोक पर फोकस किया गया है। यह दुनिया में होने वाली मौतों और विकलांगता की मुख्य वजहों में से एक मानी गयी है। इसलिए स्ट्रोक के लक्षणों और इससे ठीक होने के बाद किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए, इसके बारे में जानना जरूरी है।
आखिर क्या है ब्रेन स्ट्रोक
डॉ. संदीप ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक तब पड़ता है, जब मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में ब्लड का सर्कुलेशन कम होने लगता है। इस स्थिति में मस्तिष्क के टिश्यू को अच्छे से ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है। जिस वजह से स्ट्रोक आने के चांसेस बढ़ जाते हैं। वहीँ उन्होंने बताया कि ये आमतौर पर स्ट्रोक या तो इस्केमिक होता है या हैमरेजिक। इस्केमिक स्ट्रोक में मस्तिष्क को खून पहुंचाने वाली ब्लड वेसेल्स ब्लॉक हो जाती है। वहीं हैमरेजिक स्ट्रोक में मस्तिष्क की कोई ब्लड वेसेल्स फट जाने की वजह से मस्तिष्क में खून का रिसाव होने लगता है।
स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानें
चेहरे का ढीलापन
स्ट्रोक में आमतौर पर चेहरे का एक हिस्सा ढीला या सुन्न होने लगता है। चेहरे की इस गड़बड़ी का पता तब चलता है, जब व्यक्ति मुस्कुराने की कोशिश करता है।
कलाईयों का कमजोर हो जाना
कलाई का कमजोर होना या सुन्न होना इसका एक लक्षण है। स्ट्रोक का यह लक्षण तब स्पष्ट हो जाता है, जब व्यक्ति दोनों हाथ ऊपर उठाने की कोशिश करता है।
बोलने में कठिनाई
बोलने पर भाषा को ठीक से न बोल पाना और अजीब महसूस करना। इस समस्या की पुष्टि करने के लिए व्यक्ति से एक सरल सा वाक्य दोहराने को कहा जाता है। अगर वो एक वाक्य ठीक से नहीं बोल पाता है तो वे इससे ग्रस्त है।
इमरजेंसी सेवाओं की मदद लेने का समय
अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें।
