बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर करण जोहर अपनी फिल्मों को लेकर हमेशा ही चर्चा में रहते हैं। लेकिन हाल ही में उन्होंने एक interview में अपनी बचपन की मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम की बात शेयर की है। दरअसल वे 8 साल की उम्र से एक ऐसी मेंटल हेल्थ बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसमे वे सालों से अपनी फिजीक को लेकर कम्फर्टेबल नहीं हैं। बता दें उन्हें बॉडी डिस्मॉर्फिया की प्रॉब्लम है।

बॉडी डिस्मॉर्फिया के बारे में कारण ने बताया

बता दें कारण ने बताया कि इस समस्या से बाहर आने के लिए उन्हें मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल की मदद लेनी पड़ी। अपनी स्किन को लेकर अनकम्फर्टेबल फील करने को लेकर करण ने कहा, ‘मुझे बॉडी डिस्मॉर्फिया है। मैं पूल में जाकर बहुत अनकम्फर्टेबल फील करता हूं। मैंने सालों तक अपनी बॉडी को लेकर सहज होने की बहुत कोशिश की पर मैं इससे उबर नहीं पाया। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं कितना सक्सेसफुल हूं।

वहीँ करण ने आगे कहा, ‘इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपने आप को क्या समझते हैं। मैं हमेशा ओवरसाइज्ड कपड़ों में ही कम्फर्टेबल फील करता हूं। यहां तक कि मैंने अपना काफी वजन कम किया है पर फिर भी मैं अपनी बॉडी को लेकर अनकम्फर्टेबल हूं।

मैं नहीं चाहता कि किसी को मेरी बॉडी का कोई भी पार्ट दिखे।’ करण ने एक पुराना किस्सा शेयर करते हुए कहा, ‘जब में 8 साल का था तभी से खुद को बॉडी शेम करता आ रहा हूं। मैंने इससे उबरने के लिए थैरेपी तक ली है। एक वक्त था जब मुझे पैनिक अटैक तक आते थे और उसे ठीक करने के लिए मुझे दवाईयां तक लेनी पड़ी।’

क्या है बॉडी डिस्मॉर्फिया की बीमारी

बता दें बॉडी डिस्मॉर्फिया (Body Dysmorphic) को बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (BDD) भी कहते हैं। यह एक मेंटल डिसऑर्डर है, जो अपनी मौजूदगी को लेकर चिंता पैदा कर देता है। इस डिसऑर्डर में इंसान को लगता है कि उसकी बॉडी के कुछ पार्ट्स में परेशानियां या दिक्कत हैं।

हालांकि, उनकी ये बीमारी दूसरों के दिखे यह जरूरी नहीं है। इस बीमारी की चपेट में आने वाले इंसान को साइकोलॉजिकल दिक्कतें भी होने लगती है। इससे उनकी डेली लाइफ पर भी असर पड़ता है। इस डिसऑर्डर को अगर बचपन में ही काउंसलिंग या थेरेपी से खत्म नहीं किया जाए तो लंबी उम्र तक पीछा नहीं छोड़ती है।

बॉडी डिस्मॉर्फिया होने का कारण

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बॉडी डिस्मॉर्फिया का सही-सही और सटीक कारण जान पाना काफी मुश्किल है लेकिन कुछ वजहें इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। यह डिसऑर्डर मेंटल प्रॉब्लम्स जैसे डिप्रेशन-स्ट्रेस से जूझ रहे लोगों को अपनी चपेट में ज्यादा लेता है। वहीँ इसके लिए जीन को भी जिम्मेदार माना जाता है।

वहीँ बचपन की कुछ ऐसी घटनाएं हो सकती हैं  जो इस डिसऑर्डर का कारण बनती हैं। इसमें इमोशन को धक्का लगने वाली बात, इसके अलावा लो सेल्फ स्टीम, पैरेंट्स से बार-बार आलोचना जैसी चीजें बॉडी डिस्मॉर्फिया को जन्म देने का कारण बनती हैं।

बॉडी डिस्मॉर्फिया के लक्षण

इंसान का बिहैवियर रिपिटेटिव और टाइम कंजूमिंग होने लगता है

बार-बार शीशा देखना, स्किन नोचना, बॉडी की कमियों को छिपाने की कोशिश करना

अपने अंगों की तुलना दूसरों से करना, ये मानना कि उनकी खामिया या तो नजर नहीं आ रही या बहुत ज्यादा दिख रही है

दूसरों के कहने पर कि आप ठीक दिख रहे हैं, विश्वास न कर पाना

शरीर के किसी अंग को बार-बार छूना या मापते रहना

सेल्फ कॉन्शियस हो जाना और पब्लिकली बाहर जाने से कतराना

दूसरों के साथ रहने पर परेशान हो जाना

इस कंडीशन में सुधार के लिए प्लास्टिक सर्जरी या दूसरे कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट करवाना और इससे संतुष्ट भी न होना

By tnm

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