उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर जारी है। दरअसल कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री के पार पहुंच गया है। इसमे सुबह होते ही सूरज आग उगलने लगता है। साथ ही गर्मी से लोगों का बुरा हाल है। अस्पतालों में गर्मी से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। लू के कारण मानसिक समस्याओं से का भी लोग शिकार हो रहे हैं। जिसे सिज़ोफ्रेनिया कहा जाता है।
गर्मी के कारण दिमाग का कण्ट्रोल खो जाता है
दरअसल कनाडा में वाटरलू विश्वविद्यालय ने बताया है कि कैसे बढ़ती गर्मी मानसिक बीमारियों को जन्म देने का कारण बनती जा रही है। ऐसे में सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों के अस्पताल में भर्ती होने और यहां तक कि चरम स्थितियों में मरने की संभावना भी अधिक रहती है। वहीँ ये भी कहा गया है कि निम्न सामाजिक आर्थिक समूहों के लोगों, नस्लीय लोगों और बेघर लोगों को गर्म परिस्थितियों के संपर्क में आने का अधिक खतरा होता है।
आखिर क्या होता है सिज़ोफ्रेनिया
दरअसल सिज़ोफ्रेनिया एक मानसिक विकार है जो मस्तिष्क तक सिग्न्रल भेजने के तरीके को बाधित करने का काम करती है। मस्तिष्क का जो हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित होता है, उसमें हमारे थर्मोरेगुलेटरी कार्य भी होते हैं। यह वह हिस्सा है जो हमें बताता है कि हम बहुत गर्म हैं और हमें पसीना आने लगता है या हम बहुत ठंडे हैं और गर्म रहने के लिए हमें कांपना चाहिए।
सिज़ोफ्रेनिया खतरनाक होता है
बता दें कि सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोग सामान्य लोगों की तरह अत्यधिक गर्मी सहन नहीं का पाते हैं। उनका शरीर उन्हें सावधानी बरतने के लिए नहीं कहता है। इसके अलावा, सिज़ोफ्रेनिया के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं भी शरीर के मुख्य तापमान को बढ़ा देती है। इसका मतलब यह है कि दवा लेते समय, सिज़ोफ्रेनिया वाले लोगों को सामान्य लोगों की तुलना में गर्मी के तनाव और स्ट्रोक का अधिक खतरा होता है।
