घर में बच्चे के जन्म के साथ नए पेरेंट्स का भी जन्म होता है। बच्चा समय के साथ किस चीज पर किस तरह से अपने रिएक्शन दे रहे हैं उससे पेरेंट्स सीखते हैं। उदाहरण के लिए छोटा बच्चा जब रोता है तो पेरेंट्स को पता चलता है कि वह भूखा है या उसके डायपर को बदलने का समय आ गया है। समय के साथ जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है पेरेंट्स भी नई-नई चीजें सीखते हैं और सीखाते हैं। जन्म के 6 महीने के बाद जब बच्चा घुटनों के बल चलने लगता है तो कई बार उसे चोट लगती है वो घर के सामान को गिराते हैं और कई तरह की चीजें करते हैं। इतना ही नहीं जब बच्चा चलना सीखता है तो उठने, बैठने और दौड़ने की कोशिश के दौरान बच्चे को कई बार चोट लगती है। चोट लगने पर बच्चा रोने लगता है और पेरेंट्स उसे प्यार करने लगते हैं उसके दर्द को भुलाने की कोशिश करते हैं। तो चलिए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि बच्चे को चोट लगने पर पेरेंट्स को किन गलतियों से बचना चाहिए।

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बच्चे के गिरने के बाद पेरेंट्स को क्या नहीं करना चाहिए

डॉ. तरूण आनंद ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो डाली है जिसमें उन्होंने बताया है कि बच्चे के चोट लगने के बाद पेरेंट्स को डांटने और चिल्लाने से बचना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे पर नेगेटिव असर पड़ सकता है और वह परेशान महसूस कर सकता है।

बिगड़ेगी बच्चे की आदत

बच्चे को चोट लगने पर पेरेंट्स ज्यादा प्यार दिखाते हुए उसकी पसंद की चीजें उसे दिलाने लगते हैं। कई बार तुरंत बच्चे को गोद में उठाकर बाहर घुमाने ले जाते हैं ताकि बच्चा शांत हो जाए लेकिन रोते हुए बच्चे के साथ ऐसा करना गलत है इससे उसकी आदत बिगड़ सकती है।

पेरेंट्स नहीं समझ पाते बच्चे की हालत

डॉ. तरुण की मानें तो जब बच्चा चलने के दौरान या फिर किसी भी कारण से गिरता है तो वह रोने लगता है। ऐसे में पेरेंट्स घबरा जाते हैं, दरअसल बच्चे को चोट लगने पर न्यू पेरेंट्स इस बात को समझ नहीं पाते हैं कि तुरंत कैसा रिएक्शन देना है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस स्थिति में पेरेंट्स को दिमाग को शांत करना चाहिए और बिल्कुल भी नहीं घबराना चाहिए। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को दिमाग को शांत करना चाहिए और घबराना बिल्कुल भी नहीं चाहिए। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को शांत व्यवहार करना चाहिए और बच्चे से प्यार से पूछना चाहिए कि आखिरकार क्या हुआ और कैसे हुआ।

आत्मविश्वास बढ़ाएं

यदि बच्चे का गिरना मामूली था तो अपने बच्चे को उठने और खेलना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करें जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह छोटी-छोटी चोट पर घबराएगा नहीं।

बच्चे को शांत करें

चोट लगने के तुरंत बाद बच्चा जोर-जोर से रोने और चिल्लाने लगता है। ऐसे में न्यू पेरेंट्स को बच्चों को शांत करने पर जोर देना चाहिए। डॉक्टर का कहना है कि चोट लगने पर बच्चे को गले लगाएं। कई बार चोट लगने के कारण बच्चे के दिमाग में डर भी बैठ सकता है। इसलिए चोट लगने के बाद बच्चे को गले लगाकर शांत करें, ताकि वह अंदर से सहमे नहीं।

चोटों की जांच करें

यदि आपका बच्चा सीढ़ियां चढ़ते या उतरते वक्त गिर जाता है तो तुरंत चोटों की जांच करें। गिरने के दौरान यदि आपको बच्चे के शरीर पर किसी तरह की सूजन, चोट या लाल निशान नजर आते हैं, तो इस विषय पर डॉक्टर से बात करें।

न्यू पेरेंटिंग में कई तरह के चैलेंज होते हैं और पेरेंट्स इन्हीं से सीखते हैं, इसलिए बच्चे के साथ होने वाली छोटी-छोटी चीजों पर रिएक्शन देने की जगह शांत रहने की कोशिश करें।

By tnm

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