बरसात के दिनों में कीड़े-मकौड़ों का काटना एक आम बात है। पार्क में घूमते हुए या फिर घर की बालकनी में कीड़े अक्सर काट लेते हैं। यहां पर ये कीड़े काटते हैं वहां पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। हम और आप में से ज्यादातर लोग इस बात को गंभीरता से नहीं लेते। हम सोचते हैं कि यह आम बात है और खुद ही ठीक हो जाएगी लेकिन कई बार इसे अनदेखा करना जानलेवा भी बन सकता है।
भारत में दिखे लाइम डिजीज के कई मामले
टिक्स खून चूसने वाले पैरासाइट होते हैं और जब इंसानों में बीमारियां फैलाने की बात आती है तो ये मच्छरों के बाद दूसरे नंबर पर आते हैं। ये जब काटते हैं तो आपको बिल्कुल एहसास भी नहीं होता। इन दिनों अमेरिका जैसे कई देशों में यह पैरासाइट चिंता का विषय बना हुआ है। इन टिक्स के काटने से लोगों को लाइम डिजीज हो रही है। भारत में भी लाइम डिजीज के कई मामले सामने आ चुके हैं। पार्कों में मौजूद घास में कई बार ये बैक्टीरिया चिपककर बैठे होते हैं। हर 10 में से 1 इंसान इस डिजीज से पीड़ित हो सकता है। लाइम डिजीज का मामला पहली बार अमेरिका में 1975 में सामने आया था। इस बीमारी का नाम अमेरिका में कनेक्टिकट के लाइम शहर के नाम पर ही रखा गया है।

शरीर में हो जाते हैं लाल चकत्ते
लाइम डिजीज बोरेलिया बर्गडोरफेरी नाम के बैक्टीरिया के कारण से होता है। यह बैक्टीरिया चूहे, हिरण और दूसरे जानवरों पर मौजूद कीट से फैलता है। इस बैक्टीरिया के काटते ही शरीर पर लाल चकत्ते हो जाते हैं उसमें लिक्विड भर जाता है और सूजन भी आ जाती है। इसके कारण मरीज को बुखार, सिरदर्द, थकान और शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। यह लक्षण तीन से चार दिनों में दिखने शुरु होते हैं और महीनों तक दिख सकते हैं।
लक्षण
यह बैक्टीरिया शरीर के हर टिशूज में जा सकते हैं। धीरे-धीरे यह हमारे लिवर और नर्वस सिस्टम को अपनी चपेट में ले लेते हैं। लाइम डिजीज में सबसे पहले हमारे शरीर पर लाल निशान पड़ता है जो दिखने में तो मच्छर के काटने जैसा दिखता है लेकिन कुछ दिनों के बाद फ्लू, सर्दी, खांसी, सिरदर्द होने लगता है। गंभीर मामलों में व्यक्ति को मेमोरी लॉस भी हो सकता है। लाइम रोग के कारण चेहरे पर पैरालिसिस, हार्ट संबंधी परेशानियां, थकान और हाथों व पैरों में पिन चुभने जैसा दर्द भी हो सकता है।
इलाज
लाइम गंभीर मामलों में ही खतरनाक होता है। यदि लक्षण पहचानकर एंटीबायोटिक दवाईयों से तुरंत इलाज किया जाए तो ज्यादातर लोग ठीक हो जाते हैं। इसका इलाज जितना जल्दी शुरु हो जाता है रिकवरी भी उतनी जल्दी और आसानी से होती है हालांकि यह इंफेक्शन किसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है।
बचाव
. अपने कपड़ों को पर्मेथ्रिन से सुरक्षित रखें इससे टिक दूर रहती है।
. घर से बाहर निकलें तो पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
. बरसात के मौसम में नंगे पैर घास पर चलने से बचें।

. यदि पालतू जानवर घास से आए हैं तो उन्हें नहलाएं।
