अक्सर कहा जाता है कि जैसा खाओगे वैसा ही बनोगे। जी हां ये ज्ञान की बातें अक्सर हमें अच्छा खाने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं। लेकिन कैंसर पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों और मसालों की मिलावट पर हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आने पर चिंताएं बढ़ गई हैं कि खाना सुरक्षित है।
यूरोपीय संघ ने दी हरी झंडी
आपको बता दें यूरोपीय संघ ने इस बात को पहले ही हरी झंडी दिखा दी थी। रिपोर्टों के मुताबिक 2019 और 2024 के बीच भारत के 400 से अधिक निर्यात गुणवत्ता वाले उत्पादों को यूरोपीय संघ द्वारा अत्यधिक दूषित पाए जाने पर बैन लगा दिया था। वहीँ डेक्कन हेराल्ड द्वारा 400 भारतीय खाद्य उत्पादों की रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 उत्पाद विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं और अन्य उत्पादों के अलावा मछली में पारा और कैडमियम जैसे खतरनाक तत्वों का उपयोग किया जाता है। इसमें कहा गया है कि ऑक्टोपस और स्क्विड समेत 21 उत्पादों में कैडमियम पाया गया है, जिससे क्रोनिक किडनी रोग, हृदय रोग होने का खतरा रहता है।
59 प्रोडक्ट्स में कीटनाशक
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कम से कम 59 उत्पादों में ऐसे कीटनाशक होते हैं जिनसे कैंसर होने का खतरा है। चावल, जड़ी-बूटियों और मसालों में पाए जाने वाले रसायनों में ट्राइसाइक्लाज़ोल भी शामिल है, जो अपने कार्सिनोजेनिक और जीनोटॉक्सिक गुणों के कारण यूरोपीय संघ में प्रतिबंधित कवकनाशी है। इसके अलावा, 52 से अधिक उत्पादों में एक से अधिक कीटनाशक या कवकनाशी होते हैं।
जेह्रिला उत्पाद भी पाया गया है
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगभग 20 उत्पादों में 2-क्लोरोएथेनॉल था, जो एथिलीन ऑक्साइड का एक जहरीला उत्पाद है। इसमें ओक्रैटॉक्सिन ए, है जो बैन है लेकिन ये मिर्च, कॉफी और चावल सहित 10 उत्पादों में पाया गया था। इसके अलावा साल्मोनेला 100 अन्य उत्पादों के अलावा जैविक शतावरी, अश्वगंधा और तिल के बीज में पाया गया था।
इतना ही नहीं मूंगफली के दानों और अखरोट क्रैकर्स में एफ्लाटॉक्सिन, एक जहरीला कार्सिनोजेन और म्यूटाजेन होता है जो लिवर को नुकसान और कैंसर का कारण बन सकता है। धनिया के बीज के पाउडर में क्लोरपाइरीफोस पाया जाता है जो एक ऑर्गनोफॉस्फेट कीटनाशक, एसारिसाइड और माइटिसाइड है जिसका उपयोग मुख्य रूप से पत्ते और मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
