आज कल हर दूसरा इंसान अपनी बैली फैट से परेशान है, इसको कम करने के लिए कई तरह के कदम उठाते हैं। इसमें वे कई तरह की डाइट या एक्सरसाइज को फॉलो करते हैं। बावजूद इसके उनका बैली फैट कम नहीं होता है। ऐसे में उनको ये जानने की जरूरत है कि किस चीज से उनका बैली फैट बढ़ रहा है। इस बारे में हमने जालंधर की होमियोपैथी डॉक्टर रंजू ठक्कर से जानकारी ली। उनके मुताबिक इसके पीछे वीट यानि की गेहूं का आटा शामिल है। तो आईये इस बारे में आपको डिटेल से बताते हैं।

वीट बैली कहा जाता है

डॉ. रंजू ने बताया कि पेट के आस पास बढती चर्बी का मुख्य कारण वीट यानि गेहूं का अधिक सेवन करना है। वहीँ गेहूं की रोटी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है खासतौर पर उनके लिए जिन्हें पेट से जुड़ी बीमारियों की दिक्कत रहती है। दरअसल गेहूं में एक प्रोटीन पाया जाता है जिसे ग्लूटेन कहते हैं। यह वो प्रोटीन है जो गेहूं के आंटे में लिसलिसापन पैदा करता है जिससे गेहूं को गूंथने में आसानी हो जाती है।

अन्य बीमारियां होने का खतरा

डॉ. रंजू ने बताया कि इसके सेवन से मोटापा, बल्कि डायबिटिज और हृदय रोगों के होने खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में इसके सेवन को कम मात्रा में करना ही सही है। इसके अलावा इसके सेवन से शरीर में चीनी की मात्रा बढ़ जाती है। वहीँ अगर आप इसका सेवन करना बंद कर देते हैं तो ये आपका वजन भी कम करता है।

गेहूं का सेवन भूख भी बढ़ाता है

डॉ. रंजू ने बताया कि गेहूं में बहुत अधिक मात्रा में ग्लैडिन होता है यह एक प्रोटीन है जो भूख बढ़ाने का काम करती है। इस कारण से गेहूं का सेवन करने वाला व्यक्ति एक दिन में अपनी ज़रूरत से ज़्यादा, कम से कम 400 कैलोरी अधिक सेवन कर जाता है। ग्लैडिन में ओपीएट के जैसे गुण भी पाए गए है जिसके कारण इसका सेवन करने वाले को इसकी लत लग जाती है। वहीँ अगर इसका सेवन बंद कर दे हम ग्लूटेन मुक्त हो जाते है। ग्लूटेन तो गेहूं का सिर्फ एक भाग है। ग्लूटेन को निकाल कर भी गेंहू को देखे, तो वो फिर भी घातक ही कहलायेगा क्योंकि इसमें ग्लैडिन, अमलोपेक्टिन A के साथ साथ और भी अनेक घातक पदार्थ पाए गए है।

गेहूं की जगह मिल्लेट्स को करें डाइट में शामिल

डॉ. रंजू ने ये भी बताया कि बैली फैट को कम करने के लिए गेहूं की रोटी खाने के बजाय मिल्लेट्स से बनी रोटी का सेवन सेहत को कई लाभ देता है। इससे न तो डायबिटीज होने खतरा है और न ही अन्य कोई बीमारी।

By tnm

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