कई इलाकों में मानसून ने दस्तक दे दी है। ऐसे में मौसम ठंडा होने के साथ साथ कई बीमारियाँ भी उत्पन होती हैं। इस मौसम में बढ़ने वाले इन्फेक्शन में, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का होना सबसे कॉमन है। आपको बता दें मानसून की बारिश माइक्रोबैक्टीरिया के लिए जिम्मेदार होती है। वहीँ गर्मी और नमी में बैक्टीरिया और फंगी पनपती हैं। इतना ही नहीं भारी बारिश से रुका हुआ पानी मच्छरों और दूसरे कीड़ों को पैदा करता है। जो बीमारियां फैलाते हैं। साथ ही इस मौसम में दौरान उमस काफी ज्यादा होती है जो बैक्टीरिया पैदा करने की वजह बनती है।
आखिर क्या होती है यूटीआई की समस्या
बता दें कि यूटीआई तब होता है जब बैक्टीरिया पाचन तंत्र से पेशाब वाले मार्ग से यूरिनरी सिस्टम में घुस जाते हैं बढ़ने लगते हैं। यूरिनरी ट्रैक्ट में किडनी, ब्लैडर, युरेटर्स और यूरेथ्रा शामिल होता हैं। इन्फेक्शन आमतौर पर निचले यूरिनरी ट्रैक्ट में होता है। लेकिन अगर समय से ट्रीटमेंट न किया जाए, तो इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है। यूटीआई सबसे आम प्रकार के इन्फेक्शन में से एक है। ये ज्यादाटार पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है।
मानसून के दौरान इन्फेक्शन क्यों बढ़ जाता है
इसकी कई वजह होती हैं
ह्यूमिड वातावरण में पसीना आटा है। ऐसे में अगर पानी कम पिया जाये तो डिहाइड्रेशन होने का खतरा रहता है। डिहाइड्रेशन में पेशाब कम आता है और बैक्टीरिया हमारे यूरिनरी ट्रैक्ट में लंबे समय तक रह सकते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
बता दें बारिश और पसीने से गीले कपड़े genital area के आसपास बैक्टीरिया को पनपने के लिए मदद करते हैं। जो इंफेक्शन की वजह बनता है।
खराब और दूषित पानी भी जेनिटल एरिया में जा सकता है, इससे इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
यूटीआई के लक्षण
पेशाब करते समय दर्द या जलन होना
बार-बार पेशाब आना
गहरे रंग का पेशाब आना
थकान महसूस होना
पेट के निचले हिस्से और पेडू में तेज दर्द
ज्यादा गंभीर मामलों में बुखार, मतली और उल्टी
यूटीआई का उपचार
इसके उपचार के लिए भरपूर पानी का सेवन करें ताकि पेशाब वाले रास्ते से बैक्टीरिया बाहर निकल जाएं। ऐसा करने से इन्फेक्शन नहीं होगा।
अपने प्राइवेट पार्ट्स को नियमित रूप से साफ पानी से जरुर धोएं। खासकर टॉयलेट जाने के बाद ताकि बैक्टीरिया के फैलने का खतरा कम हो पाए।
मानसून में अगर कपडें गिले हो गये हैं तो तुरंत बदल लें।ताकि बैक्टीरिया से इन्फेक्शन न हो पायें।
पीने और खाना पकाने के लिए फिल्टर किए गए या उबले हुए पानी का उपयोग करें।
बार-बार पेशाब करना और ब्लैडर को पूरी तरह से खाली करने से बैक्टीरिया पनपने की संभावना कम हो जाती है।
