एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स आज 9 महीने के बाद अंतरिक्ष से धरती पर आ रही हैं। एस्ट्रोनॉट सिर्फ 8 दिनों के लिए ही स्पेस में गई थी लेकिन कुछ कारणों से वह वहां पर फंस गई। उनके साथ द एस्ट्रोनॉट बुच विल्मोर और स्पेस स्टेशन में मौजूद क्रू-9 के दो एस्ट्रोनॉट भी वापिस आ रहे हैं। सुत्रों की मानें तो चारों एस्ट्रोनॉट ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट 19 मार्च को करीबन 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर लैंड होंगे। ऐसे में अब सवाल यह आता है कि इतने समय तक धरती से दूर रहने के कारण जब यहां वापिस आएंगी तो उन्हें क्या-क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स होगी। तो चलिए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि सुनीता विलियम्स को किन बीमारियों का खतरा ज्यादा रहेगा।
खड़े होने में होगी दिक्कत
आपको बता दें कि सभी के कान और दिमाग में वेस्टिबुलर सिस्टम होता है। यह शरीर को बैलेंस बनाने का काम करता है। स्पेस में ग्रैविटी नहीं होती जिसके कारण यह सिस्टम अच्छे से काम नहीं कर पाता। इसके कारण धरती पर वापिस आने के बाद कुछ एस्ट्रोनॉट्स को कुछ समय तक खड़े होने, बैलेंस बनाने, आंखे, हाथ, पैर जैसे अंगों को सही बैलेंस बनाने में भी दिक्कत होती है। आपको बता दें कि 21 सितंबर 2006 को जब अमेरिकी एस्ट्रोनॉट हेडेमेरी स्टेफानीशिन-पाइपर 12 दिनों बाद स्पेस से धरती पर आई थी तो उन्हें भी ऐसी समस्या ही हुई थी।

अंधे होने का भी रहेगा खतरा
स्पेस में जीरो ग्रैविटी के कारण शरीर का लिक्विड सिर की ओर जाता है। इससे आंखों के पीछे की नसों पर ज्यादा दबाव पड़ेगा। इसको स्पेसफ्लाइट एसोसिएटेड न्यूरो ओकुलर सिंड्रोम भी कहते हैं। धरती पर आने के बाद एस्ट्रोनॉट्स का शरीर एडजस्ट करने की कोशिश करता है। इसके कारण उनकी आंखों पर असर होता है जिससे आंखों में अंधापन या इससे जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती है। कैनेडियन एस्ट्रोनॉट्स क्रिस हैडफील्ड ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी दोनों आंखों में दिक्कत होने लग गई थी उन्हें लगा था कि वह अंधी हो जाएंगी।
धरती पर चलना भूलना
धरती पर चलना-दौड़ना, उठना-बैठने के लिए मांसपेशियां ग्रैविटी के खिलाफ काम करती हैं ऐसे में स्पेस में जीरो ग्रैविटी से मांसपेशियां काम भी नहीं कर पाती। इनके चलते मांसपेशियां कमजोर होने लगती है। हर महीने हड्डियों की डेंसिटी भी स्पेस में 1% तक कम होने लगती है। इससे पैर, पीठ और गर्दन की मांसपेशियों पर भी बुरा असर होता है। 1 मार्च 2016 को जब अमेरिकी एस्ट्रोनॉट स्कॉट केली और रुसी एस्ट्रोनॉट मिखाइल कॉर्निएको भी जब स्पेस में 340 दिन बिताकर वापिस आए थे तो उन्हें भी ऐसी दिक्कतें हुई थी।
हवा में चीजें छोड़ना
स्पेस में जब कोई एस्ट्रोनॉट लंबे समय तक रहता है तो उसका दिमाग और शरीर माइक्रोग्रैविटी को भी अपना नहीं पाता। यही आदत उन्हें धरती पर लौटने के बाद कुछ समय तक भी रहता है। नासा एस्ट्रोनॉट ट्रॉम मार्शबर्न ने भी इंटरव्यू में अपनी स्पेस जर्नी को लेकर कई बातों का खुलासा किया था।
ये बीमारियां भी हो सकती हैं
. हड्डियां होगी कमजोर
. इम्यूनिटी होगी कमजोर

. अकेलापन और मेंटल स्ट्रेस
. फोकस करने में दिक्कत
. शरीर के घाव भरने की क्षमता होगी कम
. नींद आने में भी होगी दिक्कत
. ज्यादा रेडिएशन के संपर्क में आने से रहेगा कैंसर का खतरा
. डीएनए को होगा नुकसान
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
