आजकल के लोगों की खराब लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से लोग कई समस्याओं से घिर रहे हैं। इन्हीं सस्याओं में डिमेंशिया और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी शामिल है। दरअसल यह मेंटल हेल्थ से जुड़ी दुर्लभ बीमारियां हैं, जिससे मौजूदा दौड़ में लाखों लोग इनके चपेट में आ रहे हैं। वहीं मेडिकल की दुनिया में वैज्ञानिक आए दिन लोगों को बेहतर ट्रीटमेंट देने के लिए शोध करते रहते है। हालांकि एक बार फिर वैज्ञानिकों ने स्टडी करके दुर्लभ प्रकार के डिमेंशिया और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का पता लगाने के लिए एक नई तकनीक का पता लगा ली है। जी हां आप इस तकनीक का इस्तेमाल करके बड़ी ही आसानी से इन दुर्लभ बीमारियों का पता लगा सकते हैं। चलिए इस नई तकनीक के बारे में जानते हैं।
नई तकनीक से गंभीर बीमारियों का पता लगाना हुआ आसान
हाल ही के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ब्लड टेस्ट के माध्यम से दुर्लभ मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है। वहीं यह स्टडी जर्मनी के सेंटर फॉर न्यूरोडीजेनरेटिव डिजीज (DZNE) की टीम ने की है। हालांकि हम सभी को पता है कि अगर मस्तिष्क से जुड़ी कोई भी बीमारी होती है तो डॉक्टर स्कैन करके ब्रेन की जांच करते है। लेकिन अब आप आप ब्लड टेस्ट की मदद से ही मस्तिष्क से जुड़ी दुर्लभ बीमारियों का पता लगा सकते हैं।
स्टडी टीम ने क्या बताया
हालांकि नेचर मेडिसिन पत्रिका में पब्लिश स्टडी में जर्मनी के सेंटर फॉर न्यूरोडीजेनरेटिव डिजीज की टीम ने बताया कि फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD), एम्योट्रोफिक लैटरल स्क्लेरोसिस (ALS) और प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लियर पाल्सी (PSP) जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट की मदद ले सकते है। बता दें कि यह न्यूरोडीजेनरेटिव बीमारियों के स्पेक्ट्रम में शामिल हैं। वहीं इन बीमारियों के लक्षण में डिमेंशिया, व्यवहार में बदलाव, लकवा मारना, मांसपेशियों में परेशानी होना आदि गंभीर समस्याएं शामिल है।
स्टडी में किन शोधकर्ताओं ने भाग लिया
बता दें कि इस स्टडी में DZNE के अलावा यूनिवर्सिटी अस्पताल बॉन (UKB) और जर्मनी और स्पेन के अन्य शोध संस्थानों ने भी भाग लिया। इस शोध को लीड करने वाले नेता प्रोफेसर अंजा श्नाइडर ने बताया कि अभी तक इन बीमारियों का कोई सटीक इलाज नहीं मिल पाया है लेकिन ब्लड मार्कर्स यानी ब्लड टेस्ट की मदद से इन गंभीर बीमारियों का पता लगाया जा सकता है, साथ ही इनको ट्रीटमेंट के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है।
