कई बार बच्चे कुछ देर तक लगातार कांपते रहते हैं। सर्दियों के मौसम में तो नए पेरेंट्स को यही लगता है कि वह ठंड के कारण कांप रहे हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता। आपको बता दें कि यदि आपका बच्चा भी अचानक से कुछ सैकेंड्स के लिए कांपने लगता है तो यह सर्दी नहीं बल्कि उसको शूडरिंग अटैक का लक्षण भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चे का सिर, गर्दन या फिर ऐसे कह सकते हैं कि ऊपरी शरीर बिना रुके कांपने लगती है। इसके अलावा बच्चे अपने चेहरे को भी टाइट कर लेते हैं। बच्चों के लिए शूडरिंग अटैक की समस्या आम होती है। ये दौरे आमतौर पर पैरॉक्सिज्मल नॉन एपिलेप्टिक घटनाओं में से एक होते हैं हालांकि यदि आपके बच्चों को दौरे पड़ रहे हैं तो उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। तो चलिए आपको बताते हैं कि शूडरिंग अटैक की समस्या बच्चों को क्यों होती है।

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क्या होता है आखिर शूडरिंग अटैक?

बच्चों में ही शूडरिंग अटैक की समस्या आम होती है हालांकि यह समस्या बच्चों को लंबे समय तक नहीं रहती। यदि आपके बच्चों को भी कंपकंपी का दौरा पड़े और यह 10 सैकेंड्स से कम समय तक भी रह सकता है। इस दौरान बच्चे अपने आस-पास के वातावरण से नहीं कटते। आपको बता दें कि कंपकंपी का दौरा बच्चों को उसी समय आता है जब वह जाग रहे होते हैं। वहीं यदि बात उम्र की करें तो 6 महीने से लेकर 4 साल की उम्र के बच्चों को यह दौरा पड़ सकता है। ऐसी स्थिति दिन में कभी भी हो सकती है। इसकी कोई लिमिट नहीं होती।

इस वजह से होती है शूडरिंग की समस्या

बच्चों में शूडरिंग अटैक की समस्या एक इमोशनल रिएक्शन होता है। यदि बच्चा बहुत खुश हो तो भी उसे कंपकंपी का दौरा पड़ सकता है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन, गुस्सा आने जैसी स्थितियों में भी बच्चे को शूडरिंग अटैक हो सकते हैं। यह दौरे एक्साइटमेंट, खाना या किसी काम को न कर पाने के कारण भी आ सकते हैं। आमतौर पर ऐसे दौरे सुबह के समय आते हैं।

ऐसे बचाएं बच्चों को

यदि बच्चों को कंपकंपी के दौरों से आप बचाना चाहते हैं तो उन्हें आराम करने दें और लिक्विड चीजें ज्यादा दें।

. यदि ऐसी समस्या उन्हें गर्मियों में हो तो आप हल्के ठंडे पानी से नहलाएं।

. बच्चों को आने वाले इन कंपकंपी के दौरों से बचाने के लिए हल्के कपड़े पहनाएं।

. बच्चों को ज्यादा लिक्विड चीजें ही पिलाएं।

. जब भी उन्हें दौरे आएं तो कंबल में न लपेटें। उनकी शारीरिक मुद्रा खराब न करें।

. यदि बच्चा लिक्विड चीजें नहीं पीना चाह रहा तो उसके मुंह में थोड़े-थोड़े तरल पदार्थ भी आप डाल सकते हैं।

इस बात का भी रखें ध्यान

यदि आपका बच्चा 3 महीने से कम की उम्र का है तो कंपकंपी का दौरा पड़ते ही उसे डॉक्टर को दिखाएं। कोई भी इलाज खुद देने से पहले डॉक्टर या फिर एक्सपर्ट्स की सलाह जरुर लें। इससे बच्चों को भविष्य में कोई भी परेशानी नहीं होगी। बिना डॉक्टरी सलाह के बच्चों की डाइट में नए चीजें शामिल न करें।

By tnm

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